बैकुंठ चतुर्दशी मेले की तीसरी संध्या में गढ़वाली-कुमाऊंनी कवियों ने रोजगार, पलायन, महंगाई व भ्रष्टाचार पर जमकर तंज किए।
बृहस्पतिवार को हुए गढ़-कुमांऊनी कवि सम्मेलन का उद्घाटन कवि व मुख्य अतिथि पौड़ी के पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम ने किया। विक्रम कप्रवाण ने लुप्त होती लोक संस्कृति, बदलती जीवनशैली पर बदली मनखी, बदली जमानु, बदली गे सेरु समाज, बदली लाणू-खाणू, बदली गे रीति रिवाज को लयात्मक सुर में सुनाया। निरंजन सुयाल ने मुफ्त में सलाह देने व काम के समय गायब होने वालों पर चोट करते हुए बल्ली रे बल्ली, गौं मा हमारा छन सौ सल्ली, सौ सल्लियों मां कैकी नि चल्ली को शानदार अंदाज में प्रस्तुत किया। शांति प्रसाद जिज्ञासू ने मंहगाई पर तंज करते हुए ऋषि-मुनियों की धरती च यो, देवभूमि कू माटू च, गुजर बसर हो कन यख, जख 25 रुपये किलो आटू च प्रस्तुत की। यशपाल बेनाम ने कथगा भला लगदा बड़दा डाला, बड़दा नौना कविता सुनाई। बीना कंडारी ने कथगा भली मेरी बोली मेरी भाषा कविता प्रस्तुत की। मुरली दीवान ने संस्कृति व बोली भाषा को हेय दृष्टि से देखने पर व्यंग्य कसा। उमेश चमोला ने समाज में बढ़ रही जुगाड़ की कार्यशैली पर व्यंग्य किए।
हरीश जुयाल कुटज ने हास्य कविताओं से गुदगुदाया। देवेंद्र उनियाल ने पालीथिन के प्रयोग पर तंज कसे। मधुसूदन थपलियाल ने गांवों के पलायन व नेपालियों के बढ़े ग्राफ को रेखंकित किया। डा. हेमंत बिष्ट ने अपने दादा के क्रिकेट प्रेम को म्यर बूबू कुमांऊनी कविता के रूप में प्रस्तुत की। गणेश खुगशाल गणि ने पौड़ी शहर के विभिन्न आयामों पर कविताएं प्रस्तुत की। नरेंद्र सिंह नेगी ने मी सोजदा-सोचदे रे ग्यो, उ बूड्या खल्बट ऐ ग्ये मेमू कविता प्रस्तुत की। सम्मेलन का संयोजन देवेंद्र उनियाल, अध्यक्षता नरेंद्र सिंह नेगी व संचालन गणेश खुगशाल गणि ने किया। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष बिपिन चंद्र मैठानी को नरेंद्र सिंह नेगी ने गढ़वाली धाद पत्रिका भी भेंट की।
चंद्रकुंवर बर्तवाल की कविताओं की शानदार प्रस्तुति
श्रीनगर। बृहस्पतिवार देर शाम जीआईएंडटीआई मैदान में हुई गीत संध्या का शुभारंभ विद्याधर श्रीकला संस्था की ओर से प्रकृति वर्णन के साथ किया गया। प्रकृति के चितेरे कवि चंद्रकुंवर बर्तवाल की अब छाया में गुंजन होगा, जिन पर मेघों के नयन गिरे, गोरी पिता पद निसृते, आएगा बंसत पर मैं न हरा हूंगा, नदी चली जाएगी ये न कभी ठहरेगी, अपने उद्गम को लौट रही, अब बहना छोड़ नदी मेरी कविताओं को संजय पांडे ने बहुत ही तन्मयता से प्रस्तुत किया। गायक व संगीतकार संजय पांडे ने विभिन्न शास्त्रीय रागों में कवि बर्तवाल की कविताओं को संगीत में पिरोया है। इस अवसर पर प्रसिद्ध रंगकर्मी प्रो. डीआर पुरोहित, वायलिन वादक शुभम पंत, तबला वादक मनोज सोलंकी, पेडवादक हरीश पुरी आदि मौजूद थे।
श्रीनगर बैकुंठ चतुर्दशी मेले में आज
सुबह 11 बजे- जीआईएंडटीआई मैदान में पुरुष रस्साकशी प्रतियोगिता
सुबह 11 बजे- पालिका सभागार में रंगोली प्रतियोगिता
शाम 04 बजे- जीआईएंडटीआई मैदान में कमलव्यूह नाटक का मंचन।
रात 07 बजे- जीआईएंडटीआई मैदान में अखिल भारतीय हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन।
निर्णायकों की भूमिका पर सवाल
श्रीनगर। 25 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी मेले में आयोजित स्कूली छात्रों की सांस्कृतिक प्रतियोगिता के परिणामों पर सवाल उठाए हैं। गुरुरामराम राय स्कूल प्रबंधन ने जूनियर वर्ग की प्रतियोगिता के परिणामों पर आपत्ति जताई है। प्रबंधन का कहना है कि उनके छात्रों ने जूनियर वर्ग में छोलिया नृत्य की प्रस्तति दी थी। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा था, लेकिन निर्णायकों ने इसे कोई स्थान नहीं दिया। प्रधानाचार्य ने कहा कि वह आरटीआई में प्रतियोगिता के परिणामों की सूचना मांगेंगे। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि आयोजकों को निर्णायकों की उस विधा में उपलब्धि व जानकारी भी स्पष्ट करनी चाहिए। मार्शल पब्लिक स्कूल की आपत्ति के कारण मेले के उद्घाटन अवसर पर हुई परेड का आयोजकों को परिणाम रोकना पड़ा था। हालांकि आयोजकों का कहना है कि परिणामों में पूरी पारदर्शिता बरती गई है।
अमर उजाला की टीम भी करेगी प्रतिभाग
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेले में आयोजित रस्साकशी प्रतियोगिता में अमर उजाला श्रीनगर इकाई की टीम प्रतिभाग करेगी। टीम में संदीप थपलियाल, राजीव खत्री (कप्तान), राहुल डंडरियाल (उपकप्तान), मनोहर बिष्ट, रणजीत सिंह जाखी, सत्य प्रसाद मैठानी, मुकेश भट्ट, सुनील सिलसवाल, नवल खाली, मनोज उनियाल, हनुमान भंडारी आदि शामिल हैं।