राजकीय मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में प्रयुक्त सामग्री को बाहर खुले में रखा जा रहा है। वहां मवेशी और कुत्ते घुस रहे हैं। वहीं, बारिश होने पर इस कूड़े से रिस रहा पानी सड़क पर बह रहा है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में 10 साल पूर्व इंसीनरेटर (कूड़े को भस्म करने का संयंत्र) स्थापित किया गया था। यह कुछ समय संचालित होने के बाद बंद हो गया। इसकी वजह उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी न मिलना रहा। इंसीनरेटर की चिमनी की ऊंचाई आवासीय बस्ती से नीचे है जबकि चिमनी की ऊंचाई आवासीय भवनों से ऊपर होनी चाहिए ताकि कूड़ा जलाने से निकलने वाला खतरनाक धुआं आबादी को प्रभावित न करे। इस वजह से इसके संचालन पर रोक लग गई। परेशानी है कि कोविड संक्रमण काल शुरू होने के बाद संक्रमित सामग्री को नष्ट करने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। यदि इंसीनरेटर होता तो संक्रमित कूड़े को यही भस्म किया जा सकता था। कोविड अस्पताल की व्यवस्था की बात करें तो वार्ड में प्रयोग की गई पीपीई किट, ग्लब्स, खाने की डिस्पोजबल प्लेट बंद पड़े इंसीनरेटर के आगे डंप की जा रही हैं। जानवर इस सामग्री को कई बार सड़क पर ले आते हैं।
कोट:
बायो मेडिकल वेस्ट को डिस्पोज करने की मशीन स्थापित की गई है। अन्य कूड़े के निदान के लिए रुड़की की एक संस्था के साथ अनुबंध किया गया है। संस्था हर तीन दिन में कूड़ा ले जाती है।-डॉ. केपी सिंह, चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल श्रीनगर