श्रीनगर। जश्न-ए-बचपन नाट्य महोत्सव में मंचित जिस दिन चोर आया नाटक हंसते-हंसते संदेश दे गया कि किस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए। नाटक के पात्र घर में माता-पिता की अनुपस्थिति में समझबूझ कर चोर को पकड़वा देते हैं। नाटक में बच्चों, जासूस और चोरों के बीच संवाद को चुटीले अंदाज में पिरोकर दर्शकों के समक्ष जिस तरह से प्रस्तुत किया गया, वह सभी को भा गया।
एचएनबी गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के चौरास प्रेक्षागृह में चल रहे जश्न ए बचपन नाट्य महोत्सव की तीसरी संध्या में नाटककार ललित मोहन थपलियाल की ओर से लिखित जिस दिन चोर आया नाटक का मंचन किया गया। एमए थियेटर की छात्रा गंगा कुमारी और आशुतोष द्विवेदी के निर्देशन मेे बाल कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी।
नाटक की कथावस्तु में माता-पिता की गैरमौजूदगी में बच्चों को चोर के साथ सूझबूझ के साथ लड़ते हुए दिखाया गया है। नाटक में बड़ी बहन बिल्लो अपनी दोनों छोटी बहनों टुन्नी और मुन्नी को पढ़ा रही होती है। इसी बीच चोर आया-चोर आया का शोर सुनाई देता है। चोर उन्हीं के घर में छुप जाता है। बच्चे उसको देख लेते हैं और घबराने के बजाय चोर को बाहर निकलने के लिए कहते हैं। चोर रोने लगता है, तो बच्चे उसके समक्ष शर्त रखते हैं कि वह उसके खिलौने की आलमारी का ताला खोलने के बाद जाने देंगे। चोर आलमारी का ताला खोलने की कोशिश करता है। लेकिन वह खोल नहीं पाता है।
शर्त पूरी न करने पर बच्चे उसको पुन: धमकाते हैं। इस बीच जासूस गोबरदास और चपातीलाल भी चोर की तलाश में उसी घर मेें जा पहुंचते हैं। बच्चे बताते हैं कि चोर घर के अंदर है। लेकिन वह तलाशी मेें नहीं मिल पाता, क्योंकि वह दूसरे कमरे में छुप जाता है। बड़ी मशक्कत के बाद बच्चों की सूझबूझ से चोर पकड़ा जाता है।
रेनबो पब्लिक स्कूल के बाल कलाकार
श्रीनगर। इस नाटक में रेनबो पब्लिक स्कूल चौरास के 14 विद्यार्थियो ने अभिनय किया। बिल्लों की भूमिका अनुष्का नेगी, टुन्नी की भूमिका सलोनी, मुन्नी की भूमिका समृद्धि गुप्ता, गल्लों की भूमिका रिद्धि, चोर की भूमिका दिव्यांशु, चपातीलाल की भूमिका ध्रुव नेगी व गोबरदास की भूमिका अभिनव ने निभायी। वस्त्र विन्यास एवं वेश भूषा गंगा कुमारी और संगीत व मंच सज्जा आशुतोष द्विवेदी ने संभाला। वहीं, रोहित पुंडीर, अंकुर पांडेय, अरविंद टम्टा, उमंग खुगशाल व आर्यन त्यागी ने सहयोग किया।