पौड़ी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से आयोजित बीएसएमए (ब्रॉड सब्जेक्ट मैटर एरिया) समिति की बैठक संपन्न हो गई है। समिति ने देश के औद्यानिकी विवि व महाविद्यालयों में शोध व स्नात्तकोत्तर पाठ्यक्रम पुनर्गठन को संस्तुति दे दी है।
बृहस्पतिवार को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार के प्रेक्षागृह में समिति की प्रथम बैठक में भरसार विवि के कुलपति प्रो. राजेश भल्ला ने कहा कि उत्तराखंड एक पहाड़ी प्रदेश है। यहां लोगों की आजीविका संवर्द्धन में औद्यानिकी अहम कड़ी साबित हो सकती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर भरसार विवि की स्थापना भी की गई थी। उन्होंने कहा कि फलों की सघन खेती व जड़ी बूटियों पर विशेष ध्यान दिए जाने की भी आवश्यकता है। विवि औद्यानिकी व वानिकी के क्षेत्र में विभिन्न कोर्स व शोध संचालित कर रहा है। बीएसएमए की बैठक में 10 सदस्यीय समिति ने औद्यानिकी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में औद्यानिकी के शोध व स्नात्तकोत्तर पाठ्यक्रम पुर्नगठन को संस्तुति दी। बैठक की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. वीएस ठाकुर, डा. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विवि नौणी और संयोजन पूर्व निदेशक (शिक्षा) डा. एचबी लिंगैया भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने किया। इस अवसर पर प्रो. कृष्ण कुमार, प्रो. मिनीराज, प्रो. डीवीएस राजू, प्रो. अमित बरन सारंगी, प्रो. आरए कौशिक, प्रो. एसके गुप्ता व प्रो. बीपी नौटियाल आदि मौजूद थे।