पौड़ी। गगवाडस्यूं पट्टी के बलोड़ी गांव स्थित देवलेश्वर महादेव मंदिर में इस बार आठ दिनी बैकुंठ चतुर्दशी मेले में धर्म और संस्कृतिका समागम देखने को मिलेगा। अध्यात्म के इस मेले को क्षेत्र के 33 गांवों के ग्रामीणों ने नया रूप देते हुए अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से जोड़ने की अनूूठी पहल की है। यह मेला 28 अक्तूबर से तीन नवंबर तक चलेगा।
देवलेश्वर महादेव पूरे गगवाडस्यूं क्षेत्र के आराध्य हैं। बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर निसंतान दंपति मंदिर में खड़े दीये जलाकर शिवशंकर की पूजा करते हैं। मंदिर के पुजारी पंडित सुधीर चंद्र का दावा है कि जो भी दंपति मंदिर में पूरे श्रद्धा भाव से खड़े दीये (खड़े होकर दीए) जलाते हैं, उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। क्षेत्र के लोगों ने मेले को भव्य रूप देने की तैयारी की है। इस बार क्षेत्र के 33 गांवों का प्रतिनिधित्व तमलाग गांव को सौंपा गया है। देवलेश्वर महादेव मंदिर समिति के सचिव जगत किशोर बड़थ्वाल ने बताया कि इस बार तमलाग गांव से शिव ध्वजा यात्रा शुरू होगी। मेले में शिवध्वजा स्नान, क्षेत्र के विद्यालयों के छात्र-छात्राओं का मार्च पास्ट, कलश यात्रा, देव डोलियों का स्वागत, साइकिलिंग, लोक नृत्य थडिया, चौंफला, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले में आयोजित किए जाएंगे।बड़थ्वाल ने बताया कि समिति की यह भी कोशिश है कि मेले को पर्यटन मानचित्र से भी जोड़ा जाए।