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मराठी, बंगाली, असमी लोकगीतों पर थिरके दर्शक

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पौड़ी। जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी में वार्षिक कार्यक्रम ‘गूंज’ का आगाज हो गया है। तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन देश के विभिन्न प्रांतों के लोकगीतों की शानदार प्रस्तुतियों पर दर्शक जमकर थिरके।
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शुक्रवार को जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान घुड़दौड़ी के महात्मा प्रेक्षागृह में निदेशक प्रो. एमपीएस चौहान ने ‘गूंज’ का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि छात्रों की शिक्षणेत्तर गतिविधियां उनके व्यक्तित्व विकास में अहम होती हैं। कार्यक्रम के हिंदी युगल गीतों की शुरुआत सुशांत रैवानी ने आज जाने की जिद न करो... गीत से की। इसके बाद आयुषी ने तू कितनी अच्छी है मां, रोहित गुसाईं ने एक प्यार का नगमा है, व मोहनी भट्ट ने घर से निकलते ही गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां पेश पर दर्शकों की वाहवाही बटोरी। इसके बाद अपोलो टीम ने मराठी लोकनृत्य वसलि पारो, एक्रिस ने आयो भवानी, रैंप ने बंगाली लोकगीत ओ मेरी ना शुनुम, सिविकस ने धोरीबो मोने और सॉफ्टवारियर ने असमिया लोकगीत बोर्पो थारो थे, की शानदार प्रस्तुतियों पर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के नुक्कड़ नाटकों की श्रृंखला में अपोलो ने अंध विश्वास, रैंप ने गो हत्या एवं राजनीति, सॉफ्टवारियर्स ने भारतवर्ष का विश्व में अदृश्य योगदान और सिविकस ने विविधता में एकता पर शानदार अभिनय को दर्शकों के तालियों की गड़गड़ाहट मिली। कार्यक्रम का संचालन सोनिया बिष्ट, नमन रस्तोगी, सैयद राफे व तन्वी अग्रवाल ने किया। वीएम ठक्कर, इंशु चौहान, डा. एमके अग्रवाल व ओएल देवी निर्णायक रहे। इस अवसर पर कुलसचिव डा. एचएस भदौरिया, डा. आशीष नेगी, डा. संजीव नैथानी, डा. किरीट सेमवाल, डा. प्रमोद सती, डा. संदीप भट्ट, छात्रों की कमेटी में अनुज नौटियाल, शुभम पांडेय, आदित्य सेमवाल, गौरव मलकानी, कृषिका खंडूड़ी, धैर्या गुप्ता व श्वेता सिंह आदि मौजूद थे।
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