श्रीनगर। जीआईसी मरखोडा में ‘कविताओं का कारवां’ कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की कविताओं ने दर्शकों से खूब वाहवाही लूटी। जबकि पर्यावरण, स्वच्छता, नशामुक्ति, देश प्रेम व प्रेरणादायी कविताएं ज्ञानवर्द्धक रही।
विकास खंड खिर्सू के जीआईसी मरखोडा में मिशन कोशिश के तहत छात्र-छात्राओं के लिए कविताओं को करवॉ कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं में भाषाई कौशल विकसित करने के साथ ही उन्हें बेहतर मंच प्रदान करना है। इस मौके पर अध्यापिका बबीता भूषण ने वर्षा रानी अब मत बरसों व अरुणा नौटियाल ने पूछती है मेरी माटी तथा रेखा संगवान की कविता जीवन कभी सुना न हो कविताओं की सराहना की गई। जबकि छात्रा मीनाक्षी बहुगुणा की कविता दबे पांव की थी आहट कोई, हिमांशु पंवार ने पलायन रोकने के लिए कोई क्या करे व मोनिका की कविता सबसे अच्छी है मां सबसे प्यारी है मां ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इसके अलावा स्वाधीनता, सुरमा, पायल, सुमित पंवार मोहित कुमार, निखिल, आयुष, काजल, मेघा, करन आदि छात्र-छात्राओं ने अपनी कविताओं के माध्यम से पर्यावरण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया। कार्यक्रम में शिक्षक महेश गिरी की प्रस्तुति कन होंदि ब्वे, नौना पर जब चोट लगदि व कैलाश पुंडीर की कविता मी कवि नी छौ ने वाह वाही लूटी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र सुधांशु को भी सम्मनित किया गया। इस मौके पर प्रधानाचार्य प्रवेश चमोली, दुर्गेश शर्मा, जय प्रकाश डिमरी, रमा चमोली व कार्यक्रम संयोजक महेश गिरी आदि मौजूद थे।