श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से संबद्ध बेस अस्पताल से सटी एक पैथोलॉजी लैब ने एक गर्भवती महिला का ब्लड ग्रुप दो घंटे के अंदर ही बदल दिया। लैब ने पहले तो महिला का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव बताया, लेकिन रिपोर्ट पर शक होने के बाद जब परिजनों ने दोबारा जांच करवाई तो ब्लड ग्रुप बी निगेटिव बताया गया। यदि परिजन रिपोर्ट पर शंका नहीं करते, तो डॉक्टर को गलत रिपोर्ट मिलती और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।
बेस अस्पताल और संयुक्त अस्पताल के आसपास संचालित हो रहे पैथोलॉजी केंद्र अक्सर गलत रिपोर्ट देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता है। खास बात यह है कि सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर लैब का नाम बताकर मरीजों को यहां भेजते हैं। ताजा मामला राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से संबद्ध बेस अस्पताल की दीवार से सटे पैथोलॉजी लैब का है। यहां मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने गर्भवती महिला को परीक्षण के लिए भेजा। परीक्षण में महिला का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव आया। रिपोर्ट पर शंका हुई तो परिजनों ने दोबारा जांच कराई गई और इस बार ब्लड ग्रुप बी निगेटिव आया। यदि परिजन रिपोर्ट को सही मानकर डॉक्टर के पास जाते, तो गलत उपचार तय था। मामले में लैब के संचालक वेद प्रकाश ने बताया कि पहले सैंपल में कुछ गड़बड़ी हुई थी, जिसके बाद दूसरा सैंपल लिया गया। महिला को दूसरी रिपोर्ट सही दी गई है।