मुख्यमंत्री हरीश रावत का दावा है कि उनकी सरकार पूरी तरह सुरक्षित है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर यह सारा खेल खेला गया है। जो कांग्रेस के विधायक विपक्ष के साथ गए हैं, उन पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने प्रदेश में किसी भी तरह की आपात स्थिति से भी इनकार किया।
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शुक्रवार को विधानसभा में देर शाम सदन में हुए हंगामे के बाद सीएम हरीश रावत लगभग चार घंटे तक अपने मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष के साथ मंत्रणा करते रहे। रात 11.35 बजे वे मीडिया से मुखातिब हुए। घटनाक्रम के संबंध में उन्होंने कहा कि सदन में सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से हुआ है।
मैंने मीडिया से सुना है कि एक मंत्री हरक सिंह रावत ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन मेरे पास कोई इस्तीफा नहीं आया है। हरक सिंह ने खुद दो बिल पारित करवाए हैं। सभी विधेयक पारित हुए। विनियोग पारित हुआ। अभी सेशन चल रहा है। अगर बहुमत को लेकर कोई शक है तो वोटिंग करवाई जा सकती है।
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जो पार्टी के खिलाफ गए उन पर होगी कार्रवाई
सदन में जाते मुख्यमंत्री हरीश रावत।
- फोटो : AmarUjala
विधायकों के पार्टी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर भाजपा के प्रलोभन में कुछ लोगों ने ऐसा किया है तो जो कार्रवाई बनती है वह की जाएगी। अभी तक हमारे पास केवल एक चेहरा सामने आया है। सरकार के अल्पमत में आने के सवाल पर सीएम ने कहा कि यह जो बात कही जा रही है कि उनके साथ 35 विधायक हैं, यह गलत है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने सदन में जो नारे लगाए वह सदन की परंपरा का अपमान है। बीजेपी के विधायक वेल में आए और मेज आदि तोड़ी। ऐसा भाजपा करती रही है। मैंने ऐसा भी सुना है कि एक पर तो हाथ छोड़ दिया। यह बेहद शर्मनाक है। सीएम ने बजट पारित होने के सवाल पर कहा कि सारा प्रकरण हाउस स्थगित होने के बाद हुआ।
खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीएम ने कहा कि उत्तराखंड की जनता के लिए जो सही है वह हरीश के लिए भी सही है। भ्रष्टाचार के आरोप जो दो विधायक लगा रहे हैं, उनमें से एक ने अपना विधेयक पारित कराया। ऐसे में सरकार की कार्यप्रणाली से कैसे नाखुश हो सकते हैं?
सीएम ने कहा कि एक बात आज जरूर अलग थी कि सुबह से आरएसएस और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लोग दिख रहे थे। हमें लगा कि एक भाजपा के बाहुबली विधायक ने घोड़े की टांग तोड़ दी तो उसको संभालने पहुंचे हैं, लेकिन यह कुछ और ही था।
हार्स ट्रेडिंग के मामले में सीएम ने कहा कि हार्स ट्रेडिंग का गेम था या नहीं, यह हमारे संज्ञान में नहीं था। पार्टी व्हिप के अनुरूप सभी सदस्य सदन में मौजूद रहे और विधेयक पारित हुए। पूरे घटनाक्रम पर केंद्र की भूमिका पर सीएम ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
21 अप्रैल तक के लिए सदन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगित कर दिया है। ध्वनिमत से बजट भी पारित हो गया है। हम तो मतदान के लिए तैयार थे, लेकिन बजट सदन के पटल पर आते ही इन लोगों ने सदन अव्यवस्थित कर दिया। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष ने ध्वनिमत से बजट पारित कराया और सदन को 21 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया।
-इंदिरा हृदयेश, संसदीय कार्यमंत्री।
वोटिंग के समय भाजपा के 27 और नौ कांग्रेसी विधायक सरकार के साथ नहीं थे, इसलिए सरकार बहुमत खो चुकी है। सरबत करीम, गणेश जोशी और भीमलाल सदन में नहीं थे। इसलिए कुल 68 में से 35 विधायक भाजपा के साथ थे। स्पीकर वोटिंग नहीं कर सकते और बाकी सरकार के साथ थे। हमने राज्यपाल से कहा है कि यह असंवैधानिक सरकार है, इसे बर्खास्त कर देना चाहिए। स्पीकर का आचरण उत्तराखंड की राजनीति को कलंकित करने वाला है। खुद ही स्पीकर ने बजट पास करने को कह दिया, यह बगैर वोटिंग के कैसे हो सकता है, जब हमने पहले ही मत विभाजन की मांग लिखित में की गई थी।
-अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष।