राष्ट्रपति शासन के इस दौर में अब अधिकारियों को केंद्र से दरियादिल होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि प्रदेश को इस बार एक हजार करोड़ रुपये की विशेष योजना सहायता मिल सकती है। इस आधार पर शासन ने पांच हजार करोड़ रुपये तक की योजनाओं का प्रस्ताव तैयार करने का मन बनाया है।
अभी तक प्रदेश को करीब तीन सौ करोड़ रुपये तक की विशेष योजना सहायता मिलती रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह धनराशि प्रधानमंत्री की ओर से आर्थिक पैकेज के रूप में भी घोषित की जा सकती है। निकट भविष्य में इसके लिए उत्तराखंड की ओर भी रुख कर सकते हैं।
नीति आयोग के गठन के बाद से ही योजना आयोग से मिलने वाली सामान्य केंद्रीय सहायता बंद कर दी गई थी। 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से मिलने वाले पैसे में भी 13वें वित्त आयोग की तुलना में कमी बताई जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाल ही में मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री का एक पत्र भी सार्वजनिक किया था।
कुंभ के लिए मिल चुकी सौ करोड़ की धनराशि
इस पत्र में कहा गया था कि 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के लागू होने से राज्य को पहले की तुलना में नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुंभ के लिए सौ करोड़ रुपये की धनराशि केंद्र से मिल चुकी है।
इस धनराशि के जारी होने के बाद भाजपा के मुख्य सचेतक मदन कौशिक ने सत्र के दौरान ट्रेजरी बैंच से बाकायदा केंद्र सरकार का आभार जताने तक का आग्रह किया था।
अब कांग्रेस का मानना है कि राष्ट्रपति शासन का उपयोग केंद्र की मदद से भाजपा प्रदेश में चुनाव की तैयारी को भी अंजाम देने की कोशिश कर रही है।
उधर, वित्त सचिव अमित सिंह नेगी का कहना है कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। नए वित्तीय वर्ष की योजनाएं प्रक्रिया में हैं। अभी प्रदेश को एसपीए की धनराशि नहीं मिली है। उम्मीद है कि यह धनराशि भी जल्द ही जारी होगी।