सप्ताह भर में यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावित अवधि क्या होगी। यदि किसी राजनीतिक दल की सरकार का गठन नहीं हुआ तो लंबे समय से मलाईदार पदों पर जमे अधिकारियों का बदले जाने की पूरी संभावना है।
बहुत पद रिक्त पड़े हैं। शत्रुघ्न सिंह के मुख्य सचिव बनने के बाद अवस्थापना विकास आयुक्त और एस राजू के रिटायर होने के बाद समाज कल्याण आयुक्त के साथ ही पेयजल एवं स्वच्छता, विद्यालयी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के पद रिक्त हैं।
एफआरडीसी कैडर पोस्ट है और रिटायरमेंट के बाद उस पर एस राजू की पुनर्नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। आबकारी विभाग में पांच साल पहले एक पाली खेल चुके अपर मुख्य सचिव डा. रणबीर सिंह डेढ़ साल से फिर इसी महकमे को संभाल रहे है। कृषि, डेयरी, मत्स्य विभाग में भी उनका कार्यकाल जरूरत से ज्यादा हो गया है।
आठ साल से निर्वाचन विभाग संभाल रही राधा रतूड़ी
प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी पिछले आठ साल से निर्वाचन विभाग संभाल रही है। दो साल से भी ज्यादा समय से उमाकांत पंवार ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव है। आनंद बर्द्धन जबसे राजभवन गए, तब से सिंचाई व लघु सिंचाई विभाग का कोई खैरखाह नहीं है।
मुख्यमंत्री के सचिव व पीडब्लूडी, शहरी विकास, राजस्व व वित्त जैसे भारी भरकम महकमों के सचिव डीएस गर्ब्यालय के साथ ही आपदा प्रबंधन, वित्त, नागरिक उड्डयन जैसे महकमों के सचिव अमित सिंह नेगी भी हैवीवेट है।
इनकी पोस्टिंग में है तकनीकी खामी
सीएस नपलच्याल दो साल से ज्यादा समय से गढ़वाल कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पद के साथ ही परिवहन आयुक्त, शासन में परिवहन व राज्य संपत्ति के सचिव है। इनकी पोस्टिंग में तकनीकी खामी है।
मंडलायुक्त क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष होते है, उनकी अपीलीय अथॉरिटी राज्य परिवहन प्राधिकरण के चेयरमैन व परिवहन आयुक्त होते है, दोनों ही पद इन्हीं के पास है। यह अपने फैसलों की अपील खुद ही सुनते है।