महिला उत्पीड़न से जुड़े प्रकरणों की सुनवाई के लिए उत्तराखंड में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा सरकार ने वापस ले ली है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने रविवार को कहा कि इन अदालतों की जरूरत नहीं है। सामान्य अदालतों में लंबित महिला उत्पीड़न के प्रकरणों को वरीयता देते हुए निस्तारित किया जाएगा।
नए साल के उपलक्ष्य में अपने आवास पर आयोजित भोज के दौरान मीडिया से बातचीत में सीएम ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के संबंध में उनकी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बारिन घोष से बात हुई है। चीफ जस्टिस ने बताया कि प्रदेश भर में महिला उत्पीड़न के सिर्फ 546 वाद अदालतों में लंबित हैं। इनके लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की जरूरत नहीं है। न्यायालयों में इन प्रकरणों की वरीयता के साथ सुनवाई कर इनका निस्तारण किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों को अदालतें प्राथमिकता से लें और निस्तारण करें।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली गैंगरेप के बाद महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच 31 दिसंबर को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने प्रदेश में चार स्थानों पर चीफ जस्टिस से बातचीत कर फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित कराने की बात कही थी। इसके बाद शनिवार को ही चीफ जस्टिस से मुख्यमंत्री की मुलाकात हुई।
यहां बननी थीं फास्ट ट्रैक कोर्ट
देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, नैनीताल