राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मिशन के अधिकारियों के रवैये से संविदा कर्मचारी नाराज हैं। आरोप है कि कर्मचारियों की नाराजगी छुट्टी के दिन भी दफ्तर बुलाए जाने और देर रात तक रोके जाने को लेकर है। दो बार पहले भी इसी कारण से कई कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं, हालांकि अधिकारियों के रवैये में बदलाव नहीं आया है।
एनएचएम के तहत भर्ती छह संविदा कर्मियों ने 31 मार्च को इस्तीफा सौंपकर अपना अनुबंध ना बढ़ाए जाने का अनुरोध किया था। इन कर्मियों ने अपने त्याग पत्र में कुछ अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
उत्पीड़न को लेकर पहले भी दिया कर्मचारी ने त्याग पत्र
हालांकि अधिकारियों ने किसी तरह मामला संभाल लिया, जिसके बाद अधिकांश कर्मियों ने दोबारा ज्वाइन किया। इससे पहले भी एक बार कर्मचारी उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए त्याग-पत्र सौंप चुके थे। तब अधिकारियों ने मार्च फाइनल समेत कुछ मजबूरियां बताकर किसी तरह अपनी गर्दन बचाई थी।
अब एक बार फिर अधिकारी उसी ढर्रे पर काम कर रहे हैं। अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से कर्मचारी खासे परेशान हैं। नाम ना छापने की शर्त पर कुछ कर्मियों ने बताया कि मिशन अधिकारी शाम को छुट्टी के समय दफ्तर पहुंचते हैं।
उसके बाद वह कर्मियों से देर रात तक काम लेते हैं। महिला समेत अन्य कर्मियों को देर रात घर भेजा जाता है। कर्मचारी अब इस मामले में श्रम न्यायालय और राज्यपाल के सम्मुख ले जाने की रणनीति बना रहे हैं।
श्रम कानूनों का उल्लंघन
श्रम कानूनों के तहत कर्मियों से 24 घंटे में एक निश्चित अवधि तक काम लिया जा सकता है। उसके बाद उन्हें निश्चित अवधि का अवकाश भी तय है। प्रत्येक सप्ताह में एक दिन का अवकाश अनिवार्य है। अपरिहार्य कारणों से अतिरिक्त कार्य करवाने पर उसका समायोजन करना होगा। हालांकि एनएचएम में ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा है।
उच्चाधिकारियों की बैठक के लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाया गया। हमारा काम कर्मियों से काम लेना है। किसी भी कर्मचारी को काम करने में कोई दिक्कत नहीं।
- डा. नीरज खैरवाल, एमडी, एनएचएम