हल्द्वानी। जिला विकास प्राधिकरण की टीम ने यहां धान मिल तिराहे के समीप डहरिया में मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट की ओर से संचालित बाबा रामपाल के सतलोक आश्रम को बुधवार को सील कर दिया। क्षेत्र के लोगों ने वहां संदिग्ध गतिविधियां होने की शिकायत की थी, जो प्रारंभिक जांच में सही मिलीं। हालांकि सील करने की कार्रवाई आवासीय श्रेणी में स्वीकृत मानचित्र के विरुद्ध निर्माण कराकर भवन को आश्रम व सत्संग भवन के रूप में इस्तेमाल करने के आधार की गई।
प्राधिकरण के संयुक्त सचिव और सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी के नेतृत्व में बुधवार दोपहर प्राधिकरण की टीम आश्रम पहुंची। आशंका थी कि सीलिंग के दौरान बाबा के अनुयायी बाधा डाल सकते हैं। इसलिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवानों का इंतजाम किया गया था। उस वक्त आश्रम में तीन-चार कर्मी ही थे। उन्हें आश्रम खाली करने को कहा तो उन्होंने कमरों से जरूरी सामान बाहर निकाल लिया। तुरंत ही सभी कमरों पर सील कर दिया गया। अंत में आश्रम के मुख्य गेट पर भी सील लगा दी गई। संयुक्त सचिव बाजपेयी ने बताया कि भवन में गड़बड़ियों की शिकायत विभागीय जांच में सही मिलने के बाद आश्रम संचालकों को नोटिस जारी कर चालान भी किया गया था। यह मामला उनके (संयुक्त सचिव) कोर्ट में विचाराधीन था। बुधवार को कोर्ट ने उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम 1973 की धारा 15 के उल्लंघन व नियम विरुद्ध किए गए निर्माण कार्यों को देखते हुए उक्त भवन को सील करने के आदेश पारित किए। कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया कि चूंकि आश्रम में अत्यधिक लोगों का आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में यहां कभी भी शांति भंग और जनहानि हो सकती है। कार्रवाई के दौरान मौके पर एसपी सिटी प्रकाश चंद्र, सीओ नितिन लोहनी, कोतवाल राजेश कुमार समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
ये गड़बड़ियां बनीं सीलिंग के आधार
1. आवासीय भवन का उपयोग सभा भवन के रूप में किया जा रहा था। जबकि ऐसे किसी भवन के भूखंड का न्यूनतम रकबा एक हजार वर्ग मीटर निर्धारित है। यह भवन तो महज 232 वर्ग मीटर में बना हुआ है।
2. भूतल, प्रथम तल व आंशिक द्वितीय तल पर सेटबैक को प्रभावित कर अवैध रूप से अतिरिक्त निर्माण कार्य कराया गया था।
3. आश्रम के रूप में इस भवन को इस्तेमाल किए जाने के बावजूद वहां पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं थी। यहां आने-जाने वाले वाहन बाहर ही खड़े होने से जाम लगता था। इसी साल 29 अप्रैल को इस आश्रम में पांच सौ से अधिक लोग एकत्र होने से आसपास के लोगों को काफी दिक्कत हुई थी। हर रविवार को भी यहां 100-200 बाहरी लोग पहुंचते थे।
दान में मिली जमीन पर खड़ा किया आश्रम
अधिकारियों के मुताबिक आश्रम बनाने के लिए वर्ष 2021 में जमीन दान में मिली थी। इसके बाद 2022-23 में यह आवासीय भवन बनाया गया, मगर इस्तेमाल आश्रम के रूप में हो रहा था।
आश्रम की गतिविधियों पर स्थानीय लोगों ने जताया था संदेह
बीती तीन मई को डहरिया क्षेत्र के कई लोगों ने नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर बाबा रामपाल के आश्रम में संचालित गतिविधियों पर संदेह जताते हुए जांच की मांग की थी। लोगों का कहना था कि अक्सर आश्रम में बाहरी क्षेत्रों से देर रात कई महिलाएं और पुरुष आते हैं। वे सुबह होने से पहले ही वहां से चले जाते हैं। इसके अलावा पूर्व में कुछ हिंदूवादी संगठनों ने आश्रम की गतिविधियों को लेकर प्रशासन के पास शिकायत की थी।
धर्म विरोधी पुस्तकें बांटने का मामला भी आया था चर्चा में
जुलाई 2023 में देवलचौड़ चौराहे पर कुछ लोगों पर धर्म विरोधी पुस्तकें बांटने का भी आरोप लगा था। इस मामले में विहिप के जिला मंत्री गिरीश चंद्र पांडे ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कहा गया था कि कुछ लोग ऐसी किताबें बांट रहे हैं जिसमें हिंदू समाज और देवी देवताओं के लिए अपमानजनक बातें लिखी गई हैं। इन किताबों का ताल्लुक भी बाबा रामपाल के आश्रम से बताया गया था।
कौन हैं रामपाल
बाबा रामपाल हरियाणा के रोहतक जिले के गोहाना इलाके के पास स्थित बरवाला आश्रम के लिए चर्चित हैं। वह खुद को संत कबीर के अनुयायी बताते हैं और ‘सतलोक आश्रम’ नाम से कई आश्रम चलाते हैं। पेशे से इंजीनियर रामपाल हरियाणा सरकार में जूनियर इंजीनियर थे, लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर गुरु बन गए। उनका नाम कई बड़े विवादों से जुड़ा रहा है, नवंबर 2014 में उनके बरवाला आश्रम में पुलिस और उनके समर्थकों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने आश्रम से उन्हें गिरफ्तार किया।