शहर में पेयजल संकट की समस्या का निदान सिर्फ चुनावी घोषणा बनकर रह गया है। स्थिति यह है कि दमुवाढूंगा के 40 हजार लोगों को एक ट्यूबवेल से पेयजल आपूर्ति हो रही है। पाइप लाइन के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने से लोग सिर पर पानी ढोने को मजबूर हैं। कई घरों में चल रहे दो कनेक्शनों ने लोगों की मुसीबत और बढ़ा दी है।
दमुवाढूंगा की आबादी तेजी से बढ़ रही है, बावजूद इसके पेयजल आपूर्ति के संसाधन नहीं बढ़ाए गए हैं। एक ट्यूबवेल से 40 हजार लोगों को आपूर्ति की जाती है। जगह-जगह लाइनों में लीकेज और अवैध कनेक्शनों ने लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। पिछले वर्ष विभाग ने अभियान चलाकर 35 अवैध कनेक्शन काटे थे और इसके बाद इतिश्री कर ली। दमुवाढूंगा के लोग नेताओं से लेकर अधिकारियों तक की चौखट पर जल संकट से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला। हालांकि जल संस्थान के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि तीन नए ट्यूबवेल बनने से समस्या कम हो जाएगी।
गर्मियों में संकट अधिक बढ़ जाता है। ट्यूबवेल की मोटर फुंकने से लोगों को सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ता है। लोगाें को निजी टैंकर चालकों से संपर्क कर पानी की व्यवस्था करानी पड़ती है। निजी टैंकर चालक मनमाने दाम वसूल करते हैं। -संजय
जल संस्थान के टैंकर मनमाने तरीके से पानी का वितरण करते हैं। रसूखदारों के घर पर पानी पहुंचाकर वह क्षेत्र से नदारद हो जाते हैं। कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। -गणेश साहू
कई बार गुहार लगाने के बावजूद जल संकट से निजात नहीं मिली है। क्षेत्र में पाइप लाइनें भारी वाहनों के निकलने से टूट जाती हैं, मगर विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। पानी सड़क पर बहकर बर्बाद होता रहता है। -मुन्नी बिष्ट
नई पाइप लाइन बिछाने और अतिशीघ्र व्यवस्था में सुधार होने के आश्वासन कई वर्षों से मिल रहे हैं, मगर अब तक धरातल पर कुछ भी दिखाई नहीं पड़ा। नेताओं को चुनाव के समय सिर्फ समस्या नजर आती हैं और उसे बाद भूल जाते हैं। -ममता खैर
अवैध कनेक्शनों के कारण भी पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है। कई घरों में दो-दो कनेक्शन हैं और मोटर लगाकर पानी खींच लिया जाता है। सब कुछ पता होने के बाद भी विभागीय अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। -प्रेमा पांडे
विभाग की ओर से पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण ही निजी टैंकर चालकों की मनमानी चल रही है। निजी टैंकर चालकों को आखिर इतना पानी कहां से मिलता है। जल संस्थान के टैंकर चालक एक या दो टैंकर बांटकर नदारद हो जाते हैं। -मंजू नेगी