17 राज्यों के मुक्त विवि तैयार करेंगे 34 कौशल विकास कोर्स
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हल्द्वानी के उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिनी राष्ट्रीय कार्यशाला में बुधवार को कौशल विकास कार्यक्रमों शुरू करने पर चर्चा हुई। तय हुआ कि प्रत्येक मुक्त विवि दो एनसीवीईटी प्रमाणित कोर्स तैयार कर आपस में साझा करेंगे।
कॉमनवेल्थ एजुकेशनल मीडिया सेंटर फॉर एशिया (सीईएमसीए) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगोली ने वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा कि इंडस्ट्री और यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप में कोर्स चलाएं तो वह फायदेमंद होंगे। उन्होंने हॉर्टिकल्चर, एग्रीकल्चर, होटल आदि पर ऑनलाइन मोड में कोर्स चलाने पर जोर दिया। यूओयू के कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने बताया कि प्रत्येक मुक्त विवि एक साल में नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनसीवीईटी) से मान्यता प्राप्त दो कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करेंगे। 17 राज्यों के मुक्त विवि एक साल के भीतर 34 कौशल विकास कोर्स तैयार करेंगे तो सभी एक दूसरे के साथ इन्हें चला सकेंगे। कार्यशाला संयोजक प्रो. जितेंद्र पांडे ने बताया कि यूओयू एनसीवीईटी में ड्यूल रिकॉग्निशन अवॉर्डिंग एंड एसेसमेंट बॉडी के लिए भविष्य में अप्लाई कर रहा है।
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सीईएमसीए (सिमका) के निदेशक डॉ. बी शद्रच ने बताया कि बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कौशल विकास में मुक्त विश्वविद्यालयों की भूमिका को बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक प्रयास पर प्रकाश डाला गया। कार्यशाला में राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ढांचे के बारे में चर्चा की गई। भोपाल से आए प्रो. राजेश खंबायत ने भी कौशल विकास पर जानकारी दी। कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. पीडी पंत, प्रो. राजेश खंबायत, डॉ. राजेन्द्र क्वीरा, डॉ. आशुतोष भट्ट, डॉ. मंजरी अग्रवाल, डॉ. सुमित प्रसाद, डॉ. मीनाक्षी राणा आदि मौजूद रहे।
इन राज्यों के मुक्त विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि हुए शामिल
सेमिनार में उत्तराखंड और यूपी के साथ ही पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असोम, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्यों के मुक्त विश्वविद्यालयों से दो-दो प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। इग्नू के प्रतिनिधियों ने भी सेमिनार में हिस्सा लिया।