हल्द्वानी शहर की पुरानी पेयजल लाइनें लोगों को पानी पिलाते-पिलाते बूढ़ी हो चली हैं। अधिकतर लाइनों में लीकेज की समस्या है जिससे घरों तक पानी पहुंचने से पहले ही लीकेज होने की वजह से बर्बाद हो जाता है। जल संस्थान भी इन लाइनों की मरम्मत करते थक रहा है लेकिन लाइन जोड़ने के बाद फिर उसी स्थान पर लीकेज की समस्या मिलने से विभाग भी परेशान है। वहीं इस समस्या के चलते आए दिन शहर के कई इलाकों में पानी नहीं आने की समस्या मिलती रहती है जिसका अब तक स्थायी हल नहीं मिल पाया है।
लीक हो रही लाइनों से न सिर्फ पानी की बर्बादी हो रही है, बल्कि सड़कों का डामर भी उखड़ रहा है। विभाग की मानें तो हर माह लीकेज से जुड़ीं 35 शिकायतें पहुंचती हैं जिनमें विभाग टीम लगाकर मरम्मत कार्य चलाता है। शुक्रवार को अमर उजाला ने शहर की लीकेज हो रहीं लाइनों की पड़ताल की जिसमें कई स्थानों पर लाइनों से पानी रिसता हुआ मिला। इनमें से कुछ लाइनें तो ऐसी थी जिनमें दो बार मरम्मत कार्य हो चुका है लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। विभाग का तर्क है कि गर्मी में पेयजल लाइनों के फैलने से लीकेज की समस्या शुरू होती है जिससे आए दिन यह समस्या देखने को मिलती है।
नैनीताल रोड पर होटल देवाशीष के सामने
यहां जल संस्थान की शीशमहल फिल्टर प्लांट से आने वाली दो मुख्य पेयजल लाइन हैं। इनमें से एक लाइन में लंबे समय से लीकेज हो रही है और पानी नाली में बह रहा है। स्थानीय लोगों से पूछने पर पता चला कि लाइन में तीन माह से लीकेज है। पहले कम पानी रिसता था लेकिन गर्मी में पानी की अधिक बर्बादी हो रही है।
देवलचौड़ देवाशीष कॉलोनी
नैनीताल रोड पर जल निगम कार्यालय के पास
शीशमहल प्लांट की लाइन में बीते तीन माह से लीकेज की समस्या बनी हुई है। विभाग की इस पेयजल लाइन से बाजार और नैनीताल रोड पर तिकोनिया तक पानी पहुंचता है लेकिन लाइन में लीकेज होने से आस-पास छोटे-छोटे तालाब बनने लगे हैं। वहीं पानी के लीक होने से सड़क का डामर उखड़ गया और गड्ढा बन गया है जिससे सड़क पर आवाजाही के दौरान दुर्घटना का भी खतरा बना हुआ है।
बेस अस्पताल के सामने बीते 15 दिन से लीकेज की समस्या बनी है। इस पेयजल लाइन से बाजार और बरेली रोड क्षेत्र में आपूर्ति होती है। विभाग की ओर से इसे एक बार गड्ढा खोदकर ठीक किया लेकिन दो दिन बाद फिर लाइन में लीकेज की समस्या आ गई। जिसके बाद विभाग की ओर से इसकी दोबारा मरम्मत की गई लेकिन यह कार्य भी स्थायी नहीं हो पाया जिसके चलते अब विभाग लाइन की स्थाई मरम्मत के इंतजाम में लगा हुआ है।
जल संस्थान की अधिकतर पेयजल लाइनें 1970 के समय की हैं जिनमें लीकेज की समस्या आती रहती है, इनका स्थायी समाधान नई पेयजल लाइन बिछने के बाद ही होगा। जिन इलाकों में पेयजल लाइन में लीकेज हैं उनकी मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। - आरएस लोशाली, ईई, जल संस्थान।