2014 में हुए चुनाव में अजय ने प्रदीप को हराकर अपनी हार का बदला लेकर फिर से भगवा लहराया जो 2019 तक जारी रहा। चुनावी आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस सीट पर राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा का वर्चस्व रहा है। इस साल राम मंदिर का लोकार्पण हो चुका है और भाजपा इसे बढ़ी उपलब्धि बताते हुए मैदान में है। देखना होगा कि कांग्रेस राम मंदिर आंदोलन से चले आ रहे भाजपा के वर्चस्व को समाप्त करेगी या फिर से यह सीट भगवामय होगी।
विधानसभा चुनावों में भी लहराया भगवा
अल्मोड़ा संसदीय सीट पर अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत की 14 विधानसभा शामिल हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अल्मोड़ा की छह में से चार सीटों में भाजपा ने तो दो में कांग्रेस, पिथौरागढ़ की चार में से दो सीट पर भाजपा जबकि दो पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। बागेश्वर की दोनों विधानसभा सीट पर भाजपा तो चंपावत की एक सीट पर भाजपा और एक पर कांग्रेस काबिज है।
सीएम, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की है घरेलू संसदीय सीट
अल्मोड़ा संसदीय सीट पर दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला रोचक होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य के मुखिया पुष्कर सिंह धामी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा की यह लोकसभा सीट घरेलू है। दोनों ही नेता अल्मोड़ा पहुंचकर अपने-अपने प्रत्याशी और पार्टी की जीत पक्की होने का दावा कर चुके हैं।
1991 के बाद हुए चुनाव परिणाम
वर्ष जीते प्रत्याशी पार्टी
1991 जीवन शर्मा भाजपा
1996 बची सिंह रावत भाजपा
1998 बची सिंह रावत भाजपा
1999 बची सिंह रावत भाजपा
2004 बची सिंह रावत भाजपा
2009 प्रदीप टम्टा कांग्रेस
2014 अजय टम्टा भाजपा
2019 अजय टम्टा भाजपा