इनका कहना-
हाईकोर्ट जैसी संस्था को यदि शिफ्ट करना जरूरी हो तो ऐसी जगह ले जाना चाहिए जहां उसे यहां से बेहतर बनाया जा सके। वैसे नैनीताल में ही हाईकोर्ट रहना चाहिए क्योंकि हाईकोर्ट अच्छी जगह पर बहुत सुंदर बनाया गया है और नैनीताल में सभी सुविधाएं भी हैं। यहां आने वाले सभी इसकी सुंदरता और सुविधा की सराहना करते हैं। हाईकोर्ट बहुत बड़ी संस्था होती है। झारखंड राज्य भी उत्तराखंड के साथ बना था वहां हाईकोर्ट 162 एकड़ भूमि पर बना है। इसलिए यदि हाईकोर्ट शिफ्ट किया जाता है तो कम से कम 200 एकड़ भूमि में बनाया जाए। -अवतार सिंह रावत, अधिवक्ता हाईकोर्ट नैनीताल
हाईकोर्ट को अन्य जगह ले जाने के विवाद के चलते अधिवक्ता अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। -पीसी मौलेखी अधिवक्ता हाईकोर्ट नैनीताल
हाईकोर्ट को यदि शिफ्ट किया जाता है तो यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां सभी प्रकार की सुविधाएं भी हों जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पार्किंग आदि का विशेष ध्यान रखा जाए। -नरेंद्र बाली अधिवक्ता हाईकोर्ट नैनीताल
हाईकोर्ट रामनगर शिफ्ट किया जाए, वहां पर्याप्त भूमि सहित सभी प्रकार की सुविधाएं जुटाना आसान है और यह कुमाऊं गढ़वाल के बीच में भी है। इससे पूरे प्रदेश के लोगों को सुविधा रहेगी। -महावीर कोहली अधिवक्ता हाईकोर्ट नैनीताल
हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मामला सरकार और उच्च न्यायालय के बीच विचाराधीन है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगा कि उसे कहां शिफ्ट किया जाए। जहां भी शिफ्ट हो वहां आधारभूत सुविधाओं का होना जरूरी है। साथ ही अधिवक्ताओं के हित भी वहां सुरक्षित रहें। अन्य राज्यों की तरह अधिवक्ताओं को वहां हाउसिंग सोसायटी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए बार एसोसिएशन संघर्षरत है। -डीसीएस रावत अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन नैनीताल
हाईकोर्ट के लिए समूचे कुमाऊं में गौलापार ही सबसे उपयुक्त स्थान है, क्योंकि हल्द्वानी में एयरपोर्ट, रेलवे और स्वास्थ्य सुविधाओं के अलावा अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। गौलापार में पूर्व में चयनित भूमि पर हाईकोर्ट की स्थापना की जाए और आवासों के लिए आसपास के क्षेत्र में ऐसी भूमि का चयन किया जाए जो वन भूमि न हो। इससे बेहतर जगह और कहीं नहीं हो सकती है। -पूरन सिंह रावत, अधिवक्ता हाईकोर्ट नैनीताल