देहरादून निवासी रेनू पॉल ने वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि देहरादून के फुटहिल, विशेषकर भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाए। याचिका में कहा गया है कि 30 डिग्री ढलान वाले संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण हो चुका है।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून जिले की पहाड़ियों की तलहटियों में हो रहे कथित अवैध निर्माण के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए), उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और अन्य पक्षकारों को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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मामले के अनुसार देहरादून निवासी रेनू पॉल ने वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि देहरादून के फुटहिल, विशेषकर भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों पर रोक लगाई जाए। याचिका में कहा गया है कि 30 डिग्री ढलान वाले संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण हो चुका है। ये इलाके पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। ऐसे क्षेत्रों में बिना समुचित जांच के निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। याचिका में निर्माण कार्यों पर रोक लगाने के साथ इन क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण कराने की भी मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि याचिका दायर हुए लगभग छह वर्ष बीत चुके हैं। संबंधित पक्ष अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं कर सके हैं जबकि न्यायालय उन्हें कई बार समय दे चुका है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि दो मई 2021 को हाईकोर्ट ने एमडीडीए और नगर निगम आयुक्त को संबंधित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट सहित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। अब तक इसका अनुपालन नहीं किया गया। इस दौरान पहाड़ियों की तलहटियों की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। उनके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम भी नहीं उठाए गए हैं।