वादियों में पर्यटन के आकाश पर इस वक्त घोर कुहासा छा गया है। चिंताएं गहरी हैं और पर्यटन से पलने वाला हर चेहरा बेहद मायूस। पर्यटकों की आमद से आबाद रहने वाले खुशनुमा माहौल पर यह आतंकी नजर है। ऐसी कि पीक सीजन में इस वक्त भी यहां पर्यटक कम नजर आने लगे हैं। ऊपर से कारोबारियों के लिए अघोषित इमरजेंसी जैसे हालात यह कि 15 मई के बाद से जून तक की एडवांस बुकिंग 90 प्रतिशत कैंसल हो चुकी है।
पर्यटक सीजन में ऑफ सीजन की यही आहट डराने वाली है। गर्मी के पीक सीजन में आने के लिए पर्यटकों ने जब न कह दी है, तब पर्यटन कारोबार को गहरी ठेस लगती दिख रही है। पर्यटन कारोबार से नैनीताल ही नहीं आसपास के तमाम इलाकों में हजारों हाथों को प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलता है। यही हाथ अब पीक सीजन में खाली हाथ होने के डर से बेचैन हैं।
झीलों की नगरी नैनीताल के साथ ही भीमताल, नौचुकियाताल, सातताल के साथ ही काॅर्बेट की नगरी रामनगर तक लगातार पर्यटक बुकिंग निरस्त कर रहे हैं। जिस रफ्तार से बुकिंग कैंसल हो रही है, उसी तेजी से पर्यटन भी मायूस होता नजर आ रहा है।
नैनीताल में इस समय पांच फीसदी भी काम नहीं है। सैलानी हर दिन मई-जून की एडवांस बुकिंग निरस्त करा रहे है। उनमें भारत-पाक युद्ध का भय बना है। ऐसे में कोई भी परिवार को लेकर बाहर नहीं निकलना चाह रहा है। नैनीताल में 90 फीसदी तक एडवांस बुकिंग निरस्त हो चुकि है।
- दिग्विजय सिंह बिष्ट, अध्यक्ष होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन नैनीताल।