नए मुख्यमंत्री को लेकर लगते रहे कयास
विपक्ष के हाथ लगा मुद्दा, कांग्रेस ने कहा-भाजपा ने प्रदेश को प्रयोगशाला बनाया
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अब कयास इस बात के हैं कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा? दूसरी तरफ विपक्षी दलों तो ताजा घटनाक्रम से भाजपा पर हमले का एक और मौका दे दिया है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री बदले जाने की चर्चाएं तेज हुई तो लोग टीवी के सामने डट गए। फोन से भी अपने संपर्कों के जरिये अंदरखाने की बात पता करने की कोशिश करने लगे। नए सीएम को लेकर कयास लगाए जाने लगे। इन सबके बीच कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने पूछे जाने पर कहा कि वह मुख्यमंत्री बदलने की बात सुन रहे हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो जरूर कोई तकनीकी बात रही होगी। इसको लेकर केंद्रीय नेेतृत्व जो भी फैसला लेगा, सभी उसी के साथ होंगे। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रकाश रावत का कहना था कि चुनाव आयोग ने पूरे देश में उप चुनाव को लेकर असमर्थता जताई है। ऐसे में राज्य में सांविधानिक संकट पैदा हो रहा था। इसी के दृष्टिगत जो भी कदम उठाया जाएगा, वह राज्य हित में होगा।
विपक्ष ने साधा निशाना
हल्द्वानी। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री महेश शर्मा ने कहा कि भाजपा ने राज्य को प्रयोगशाला बना दिया है। वह लगातार प्रयोग कर रही है। उनके पास मुख्यमंत्री लायक चेहरा नहीं है। इसकी मार जनता झेल रही है। आम आदमी पार्टी के प्रदेेश प्रवक्ता समित टिक्कू ने कहा कि भाजपा ने राज्य की जनता को छला है। प्रचंड बहुमत के बाद बार-बार सीएम बदलना भाजपा सरकार के कुशासन और विफलता की पोल खोलता है। जनता इसे माफ नहीं करेगी।
व्यापारी बोले, भाजपा ने उत्तराखंड को मजाक बना दिया
हल्द्वानी। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी और देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के संस्थापक प्रदेश अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर का कहना है कि भाजपा ने उत्तराखंड का मजाक बना दिया है। जनता ने 57 विधायक जिताकर दिए लेकिन दिल्ली ने मतदाताओं का अपमान किया है। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा जानने का लोगों को हक होना चाहिए। प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा का कहना है कि प्रदेश में जिस तरह बार-बार मुख्यमंत्री बदले जा रहे हैं उससे राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण पैदा हो गया है। इसका खामियाजा पूरा प्रदेश उठा रहा है। व्यापारी वर्ग को ऐसी सरकार से किसी तरह के सहयोग की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। (माई सिटी रिपोर्टर)
तो उपचुनाव में किस्मत आजमाने का सपना नहीं होगा पूरा
हल्द्वानी। हल्द्वानी विधानसभा की सीट नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद खाली हो गई है। इस सीट को प्रदेश की सबसे वीआईपी विधानसभा में शुमार किया जाता रहा है। इस सीट पर भी उपचुनाव की संभावनाओं को लेकर बात हो रही थी। पर जो हालात लग रहे हैं, उससे इस सीट पर चुनाव होगा, यह फिलहाल संभव नहीं लग रहा है। ऐसे में इस सीट से चुनाव लड़ने की हसरत रखने वालों को मैदान में उतरने के लिए वर्ष-2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव तक के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।