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Panchayat Chunav 2025: युवाओं में ग्राम प्रधान से लेकर जिपं सदस्य की कुर्सी पर कब्जे के लिए मची हुई है होड़

Mon, 07 Jul 2025 11:47 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी

सार

गांवों में पंचायत चुनाव का शोर है और युवाओं में ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी पर कब्जे के लिए होड़ मची हुई है। हर दावेदार इस वक्त खुद को सामने वाले से अधिक कर्मठ, शिक्षित और ईमानदार साबित कर रहा है।
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पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गांवों में पंचायत चुनाव का शोर है और युवाओं में ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी पर कब्जे के लिए होड़ मची हुई है। हर दावेदार इस वक्त खुद को सामने वाले से अधिक कर्मठ, शिक्षित और ईमानदार साबित कर रहा है। हालांकि बहुत कम लोग हैं, जिन्हें पता है कि जिस पद की वे दावेदारी कर रहे हैं, उसके कर्तव्य क्या हैं। रविवार के अंक में हमने आपको पंचायत प्रतिनिधियों को मिलने वाले मानदेय और सहूलियतों की जानकारी दी थी। आज जानिए, पंचायत प्रतिनिधियों के कर्तव्य क्या हैं।

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ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधान का कर्तव्य ग्राम सभा की बैठकों की अध्यक्षता कर प्रस्तावों को लागू कराना, गांव में स्वच्छता और स्वच्छ जल की व्यवस्था करना व गांव में खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। गांव का विकास, कृषि विकास, गांव में शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाना और बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाना, रोजगार के अवसर पैदा करना, केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को गांव के लोगों तक पहुंचाना प्रधान की जिम्मेदारी है।

उप प्रधान 
ग्राम प्रधान की अनुपस्थिति में उसके कार्यों का निर्वहन करना, ग्राम पंचायत के सामान्य या विशेष प्रस्तावों द्वारा निर्देशित कार्यों को करना और ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में सहयोग करना। ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में सहयोग करने के अलावा उप प्रधान का कर्तव्य डीएम, सीडीओ और जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से समय-समय पर सौंपे गए अन्य कार्यों को कराना है।
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क्षेत्र पंचायत सदस्य
क्षेत्र पंचायत सदस्य को क्षेत्र पंचायत की बैठकों में भाग लेकर उन पर चर्चा करना और क्षेत्र पंचायत की ओर से पारित प्रस्तावों को लागू करने में सहयोग करना होता है। क्षेत्र पंचायत के कामकाज में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं को लागू कराना बीडीसी सदस्य का दायित्व है। जनप्रतिनिधि को क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं की पहचान कर उनका समाधान कराना होता है।

जिला पंचायत सदस्य
जिला पंचायत सदस्य का मुख्य कर्तव्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना है। इसके अतिरिक्त उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में भी योगदान देना होता है। गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तीकरण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहयोग करना, आपदा की स्थिति में राहत कार्यों में योगदान करना, प्रभावितों की मदद करना व जिला परिषद की ओर से सौंपे गए कार्यों को कराना भी उनका दायित्व है।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष 
जिला पंचायत उपाध्यक्ष का मुख्य कर्तव्य जिला पंचायत अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उसके कार्यों का निर्वहन करना और विभिन्न समितियों के कार्यों में समन्वय स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त उन्हें स्वास्थ्य, स्वच्छता और अन्य विकास योजनाओं की निगरानी करने और सरकार द्वारा कार्यान्वित की जाने वालीं योजनाओं की निगरानी करने में भी भूमिका निभानी होती है।

जिला पंचायत अध्यक्ष 
जिला पंचायत की बैठकें आयोजित कर उसकी अध्यक्षता करना, जिला पंचायत की निधि की सुरक्षा करना, उसका सही तरीके से उपयोग कराना, जिला पंचायत के अधिकारियों व कर्मचारियों पर नियंत्रण बनाना, उनके कार्यों का मूल्यांकन करना, जिले में प्राकृतिक आपदाओं के समय मुख्य कार्यकारी अधिकारी से सलाह मशविरा कर त्वरित कार्रवाई कराना, जिला पंचायत के वित्तीय एवं कार्यपालिका प्रशासन पर नियंत्रण रखना।

ब्लॉक प्रमुख
विकासखंड में विकास योजनाओं को लागू करना, ग्राम पंचायतों के कार्यों ब्लॉक प्रमुख का पर्यवेक्षण करना और क्षेत्र के विकास के लिए सरकार से धन और संसाधन प्राप्त करना ब्लॉक प्रमुख के प्रमुख कर्तव्यों में शामिल है। इसके अतिरिक्त ब्लॉक प्रमुख ब्लॉक स्तर पर जनहित से जुड़े मुद्दों की पहचान कर उससे जुड़ीं समस्याओं को हल कराना और विकास योजनाओं की प्राथमिकता तय करना उनकी जिम्मेदारी है।

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