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विश्व साहित्य की संकल्पना अनुवाद के बिना संभव नहीं : गरचा

Sat, 28 Mar 2026 02:36 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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भवाली (नैनीताल)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के महादेवी वर्मा सृजनपीठ में शुक्रवार को कवयित्री महादेवी वर्मा के 119वें जयंती पर समकालीन वैश्विक काव्य संसार और हिंदी संवाद व अनुवाद विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि सरबजीत गरचा ने कहा कि विश्व साहित्य की कल्पना को साकार करने में अनुवाद सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपकरण है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुवाद के बिना विश्व साहित्य की संकल्पना संभव नहीं है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति नवीन चंद्र लोहनी ने बताया, हिंदी में विश्व साहित्य के अनुवाद की एक सुदृढ़ परंपरा रही है। महादेवी सृजन पीठ के निदेशक शिरीष कुमार मौर्य ने अनुवाद के व्यापक क्षेत्र और इसकी पुरानी परंपरा पर विचार रखे। प्रोफेसर चंद्रकला रावत ने कहा कि विश्व साहित्य के अनुवादों से हिंदी साहित्य को नवीन दृष्टि मिली है।
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यहां प्रो. हरिप्रिया पाठक, पीठ समन्वयक मोहन सिंह रावत, मेधा नैनवाल, डॉ. नगेंद्र द्विवेदी, अंबरीश कुमार, अनिल आर्य, डॉ. सुचित्रा अवस्थी, डॉ. राजेंद्र कैड़ा, डॉ. अनिल कार्की, डॉ. कुमार मंगलम, डॉ. शशि पांडे, डॉ. कंचन आर्या, डॉ. मथुरा इमलाल आदि मौजूद थे।
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