फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संपूर्णानंद शिविर खुली जेल को बंद करने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

Sat, 19 Mar 2016 01:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
विज्ञापन
विज्ञापन
नैनीताल। सितारगंज स्थित संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) की भूमि को सरकार की ओर से विभिन्न कंपनियों, विभागों और अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरित करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को 30 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन


इस प्रकरण पर अमर उजाला में छपी खबर की कटिंग को याचिकाकर्ता ने कोर्ट में प्रस्तुत किया है।  मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई। ऊधमसिंह नगर निवासी सुरेंद्र सिंह संधू ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि शिविर के पास 5965 एकड़ भूमि थी, जिसमें से उपरोक्त 5325.92 एकड़ भूमि विभिन्न विभागों को हस्तांतरित की जा चुकी है।

वर्तमान में शिविर के पास लगभग 640 एकड़ भूमि शेष है। इसमें 130 एकड़ कृषि योग्य एवं 510 एकड़ में नदी, नाले, आवासीय, अनावासीय भवन, कच्ची-पक्की सड़कें, झाड़ी, वृक्ष, बैगुल, नदी एवं कैलाश नदी से बाढ़ प्रभावित भूमि है। याचिका में कहा कि सरकार की ओर से 17 मई 2013 को 487.31 भूमि सिडकुल को दे दी गई।
विज्ञापन


यह भी कहा गया कि राज्य सरकार खुली जेल को बंद कर उसकी जमीन औद्योगिक विकास विभाग को बेचना चाहती है। याचिकाकर्ता की ओर से संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) को सुरक्षित, संरक्षित और सुधार के साथ-साथ यथास्थिति बनाए रखने की प्रार्थना की गई। साथ ही जेल में बंद कैदियों की सुविधाओं में कोई कटौती न करने की मांग की गई। इस पर पक्षों की सुनवाई के बाद संयुक्त खंडपीठ ने सरकार से 30 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें