प्रदेश के सबसे बड़े डीएवी कॉलेज में एबीवीपी ने भले ही भगवा झंडा लहरा दिया, लेकिन कुमाऊं के सबसे बड़े एमबीपीजी में एबीवीपी ठाकुर और ब्राह्मण के झगड़े से बाहर नहीं निकल पा रही है। एबीवीपी से अध्यक्ष पद के लिए ठाकुर और ब्राह्मण दावेदार हैं।
जातिवाद के झगड़े से संगठन में दोफाड़ हो गया है। दोनों ही धड़ों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को स्वयंभू अध्यक्ष बनाकर पूरा शहर होर्डिंग से पाट दिया है। इस झगड़े से कार्यकर्ता असमंजस में फंसे हैं।
एमबीपीजी छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव कॉलेज की छात्र राजनीति ही नहीं बल्कि हल्द्वानी विधानसभा को भी प्रभावित करता है। 2017 में विधानसभा चुनाव हैं। इस लिहाज से भी इस बार कॉलेज छात्रसंघ का चुनाव महत्वपूर्ण है। एबीवीपी में अध्यक्ष प्रत्याशी को लेकर नेताओं का झगड़ा चरम पर पहुंच गया है।
विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह ही छात्रसंघ चुनाव के लिए भी प्रत्याशी चयन को लेकर एबीवीपी में जातिवाद हावी हो गया है। संगठन के पूर्व और वर्तमान नेता ठाकुर और ब्राह्मण समीकरणों पर दाव खेल रहे हैं।
एबीवीपी से विजय जोशी और नीरज मेहरा दावेदार हैं। संगठन में अधिकतर मौजूदा पदाधिकारी ब्राह्मण हैं और विजय जोशी के समर्थन में हैं। जबकि, संगठन के पूर्व पदाधिकारी अधिकांश ठाकुर हैं और नीरज मेहरा को चुनाव लड़वाने के लिए ठाकुर लॉबी साथ खड़ी हो गई है।
संगठन के नेताओं ने अपने-अपने चहेतों को टिकट दिलाने के लिए कार्यकर्ताओं को भी ठाकुर और ब्राह्मण में बांटकर संगठन के हाईकमान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं दोनों ही धड़ों ने अपने प्रत्याशियों को स्वयंभू अध्यक्ष तक बना दिया है।
कॉलेज, आसपास के साथ ही पूरा शहर पोस्टर और होर्डिंग से पाट दिया है। 12 सितंबर तक एबीवीपी का प्रत्याशी घोषित होने की संभावना है। प्रत्याशी घोषित करने में देरी हुई तो संगठन को भितरघात से संभलने का मौका नहीं मिलेगा।