उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े एक मामले में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपी एंड टी) ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की नैनीताल सर्किट बेंच को सूचित किया है कि कर्मचारियों की गोपनीय वार्षिक रिपोर्ट देने के लिए 360 डिग्री जैसी कोई प्रणाली लागू नहीं है। यह आश्चर्यजनक इसलिए है कि पूर्व में संजीव की नियुक्ति इसी आधार पर खारिज हो चुकी है जिसे प्रचलन में ही न होना बताया गया है।
जानकारी के अनुसार भारत सरकार में ऐसे मूल्यांकन संबंधी कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है। डीओपीटी की ओर से यह खुलासा कैट की नैनीताल सर्किट बेंच के समक्ष इस महीने दायर हलफनामे के रूप में हुआ है।यह घटनाक्रम इस तथ्य के कारण बहुत महत्वपूर्ण है कि इससे पहले वर्ष 2017 में, डीओपीटी ने कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एक विस्तृत लिखित प्रस्तुति में बताया था कि यह प्रणाली क्यों शुरू की गई थी और इसे कैसे क्रियान्वित किया जाता है।
उस प्रस्तुति में डीओपीटी ने कहा था कि 360 डिग्री मूल्यांकन की शुरुआत से पहले सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर पर पैनलीकरण केवल एसीआर और एपीएआर के मूल्यांकन के आधार पर किया जाता था। इस प्रणाली में कई प्रकार की दिक्कतें थीं इसलिए देवदत्त फैसले के बाद से अधिकांश अधिकारियों को दस या उसके आसपास ग्रेड दिया गया था क्योंकि एसीआर व एपीएआर संबंधित अधिकारी को बतानी होती है।
इस प्रणाली में ऐसे उदाहरण भी थे जहां रिपोर्टिंग, समीक्षा और स्वीकार करने वाले अधिकारियों की ओर से अलग-अलग ग्रेडिंग दी गई थी, जिससे अंतिम निर्णय लेने में बहुत परेशानी आती थी। इसके बाद संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उसे मौजूदा 360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली अपारदर्शी और व्यक्तिपरक लगती है क्योंकि दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की चिंताओं का समुचित समाधान नहीं किया गया था।
साथ ही इस प्रक्रिया में फीडबैक अनौपचारिक रूप से प्राप्त किया जाता है, जिससे प्रक्रिया में हेरफेर होने की आशंका रहती है। इसमें सिफारिश की गई थी कि इनपैनलमेंट की प्रक्रिया को अधिक उद्देश्यपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इधर संजीव चतुर्वेदी ने पिछले साल दिसंबर में कैट के समक्ष एक याचिका दायर की थी जिसमें कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले सिविल सेवा बोर्ड (सीएसबी) और कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) की ओर से 360 डिग्री मूल्यांकन और मूल्यांकन सहित उनके मूल्यांकन से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे गए थे जिनके आधार पर भारत सरकार में संयुक्त सचिव और समकक्ष स्तर पर पैनल में शामिल होने के उनके मामले को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने पिछले साल नवंबर में खारिज कर दिया था। इस पर कैट ने पिछले साल दिसंबर में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
इस महीने दाखिल अपने जवाब में डीओपीटी ने कहा है कि आवेदक 360 डिग्री मूल्यांकन के रिकॉर्ड मांग रहा है जो रिकॉर्ड मौजूद नहीं हैं। 360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली के संबंध में इसमें आगे कहा गया है कि सरकार में ऐसी कोई प्रणाली नहीं है।मामले की सुनवाई की अगली तारीख 21 नवंबर तय की गई है।