नैनीताल। राज्य के विद्यार्थियों को अगले सत्र से कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषाओं का ज्ञान दिया जाएगा। इसके लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार किए जा चुके है। कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा को आगे बढ़ाने के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में इस भाषाओं को एक विषय के रूप में शुरू किया जा रहा है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कमेटी के चेयरमैन और कुविवि के कुलपति प्रो. एनके जोशी की मानें तो अगले सत्र से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने जा रही है। कहा इसके लिए इन दिनों कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में कार्यशाला आयोजित कर वृहद रूप से पाठ्यक्रमों का मंथन किया जा रहा है। कहा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में गढ़वाल मंडल में गढ़वाली जबकि कुमाऊं मंडल में कुमाऊंनी भाषा का अध्ययन कराने के लिए पाठ्यक्रम बनाए गए हैं। अगले सत्र से राज्य के छात्र-छात्राओं को कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषाओं का अध्ययन कराया जाएगा। कहा इन पाठ्यक्रमों को लागू करने से राज्य में लोक भाषाओं के संरक्षण और संवर्द्धन होगा। साथ ही लोक भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा।
युवाओं को मिलेगा रोजगार: प्रो. जोशी
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी ने कहा स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने से युवाओं को रोजगार के नए आयाम मिलेंगे। कहा इससे पलायन भी कम होगा। कहा कुमाऊंनी और गढ़वाली बोलियां हैं और इनकी लिपि देवनागरी है। कहा आज समय बेहद तेजी से बदल रहा है। अगर युवा कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा का अध्ययन करेंगे, तो भाषा का प्रचार होगा। साथ ही युवा एक-दूसरे से अपनी मातृभाषा में संवाद कर पाएंगे। जिससे लोक भाषा कुमाऊंनी और गढ़वाली को बढ़ावा मिलेगा।
कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषाओं में होंगे कार्यक्रम
नैनीताल। कुुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा को बढ़ावा देने के लिए इस भाषा के ज्ञान के साथ ही विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषाओं में विभिन्न संस्थानों में वाद-विवाद, निबंध लेखन और साहित्यक सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी।