छात्रसंघ चुनाव न कराने के लिए हाईकोर्ट की सहमति के बाद पिछले एक साल से चुनावी तैयारी में जुटे छात्र-छात्राओं की उम्मीदों को झटका लगा है। छात्र नेताओं का कहना है कि इसके लिए सरकार और शासन जिम्मेदार है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
छात्र नेताओं का कहना है कि एक ओर सरकार वार्षिक कैलेंडर जारी करती है, उसमें चुनाव की तिथि निर्धारित की जाती है। दूसरी ओर कुलपति भी 25 सितंबर तक चुनाव कराने की बात करते हैं। मगर चुनाव कोई कराने को तैयार नहीं। उन्होंने कहा, सरकार छात्रों के हितों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
छात्र नेताओं का फूटा गुस्सा
छात्रसंघ चुनाव न कराकर सरकार छात्रों की आवाज दबाना चाह रही है। इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन और सरकार समय पर चुनाव नहीं करा पाया, इसमें छात्रनेताओं की क्या गलती है। छात्रों की पढ़ाई सहित हर चीज की भरपाई होनी चाहिए।
छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को चुनाव कराने के लिए विचार करना चाहिए। इस संबंध में सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा। लंबे समय से छात्रनेता तैयारी कर रह रहे हैं, इसलिए चुनाव होने चाहिए।