नैनीताल। हाईकोर्ट ने हरिद्वार इकबालपुर स्थित चीनी मिल द्वारा गन्ना किसानों का 2017-2018, 2018-2019 के करोड़ों रुपये के बकाए का भुगतान न करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी हरिद्वार वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने उनसे कहा है कि कितनी शुगर बेची जा रही है और पांच दिन में कितना स्टॉक आ रहा है, इसका विवरण कोर्ट में पेश करने के साथ ही 15 दिसंबर को खुद भी कोर्ट में पेश हों।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी नितिन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार स्थित इकबालपुर चीनी मिल (धनश्री एग्रो) पर गन्ना किसानों का 2017-18 का 108 करोड़ और 2018-19 का 109 करोड़ का भुगतान बकाया है। सरकार के आदेश पर चीनी मिल को शॉफ्ट लोन के रूप 214 करोड़ रुपये विभिन्न बैंकों से दिया गया जबकि जनता की जमा राशि को शॉफ्ट लोन के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि गन्ने का भुगतान करने के लिए जब्त की गई चीनी की नीलामी की जाए। जिलाधिकारी हरिद्वार ने इससे पहले कोर्ट को बताया था कि इकबालपुर चीनी मिल प्रशासन को सहयोग नहीं कर रही है। इस मिल से करीब 19903 किसान प्रभावित हैं। कोर्ट के आदेश पर प्रशासन की ओर से खोले गए खातों में चीनी बेचे जाने के बाद करीब 28 करोड़ रुपये जमा हुए हैं जबकि देनदारी 154 करोड़ की है। सरकार फिलहाल यह रकम किसानों को बांटने के लिए तैयार है।