भवाली (नैनीताल)। तल्ला रामगढ़ स्थित श्री अरविंदो आश्रम की 150वीं जयंती पर रविवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्व पर्यावरण दिवस पर श्री अरविंदो आश्रम दिल्ली ब्रांच के सौजन्य से इसके तल्ला रामगढ़ स्थित शाखा मधुबन आश्रम में अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से पद्मश्री एवं श्री अरविंदो आश्रम की चेयरपर्सन तारा दीदी और डॉयरेक्टर डॉ अंजू खन्ना के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं और अन्य संस्थानों को निशुल्क फलदार पौधे बांटे गए। इस मौके पर उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया।
इस मौके पर पद्मश्री तारा दीदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधों को लगाने के साथ-साथ उनकी देखरेख का जिम्मा भी स्वयं लेना होगा । उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण जरूरी है।
आश्रम की निदेशक डॉ अंजू खन्ना ने कहा कि संस्था की ओर से पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं पर भी कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए अमर उजाला का विशेष सहयोग मिला है। कार्यक्रम का आयोजन प्रोजेक्ट लीडर अमित अग्रवाल ने किया। उन्होंने बताया कि इसी श्रृंखला में आगामी सप्ताहों में स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाएंगे और पूरे वर्ष इसी प्रकार के विभिन्न समाजसेवी आयोजन होते रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन प्रोजेक्ट लीडर अमित अग्रवाल ने किया।
उद्यान विभाग ने दिए फलदार पौधे
भवाली (नैनीताल)। जिला उद्यान अधिकारी डॉ नरेंद्र कुमार ने बताया कि अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण अभियान चलाना बेहद सराहनीय प्रयास है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से अमर उजाला फाउंडेशन को 1500 फलदार पौधे वितरित किए जाएंगे इनमें से 550 पौधे उपलब्ध करा दिए गए हैं। शेष पौधे भी मंगा लिए गए हैं। उन्होंने लोगों से पौधों का संरक्षण करने में सहयोग करने के लिए कहा है।
स्वरोजगार में भी मदद कर रहा श्री अरविंदो आश्रम
गांव की 80 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा
भवाली(नैनीताल)। श्री अरविंदो आश्रम दिल्ली के सौजन्य से इसके तल्ला रामगढ़ स्थित शाखा मधुबन आश्रम में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को स्वरोजगार से भी जोड़ा जा रहा है। संस्था महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर रही है।
श्री अरविंदो आश्रम की चेयरपर्सन तारा दीदी ने बताया कि श्री अरविदों आश्रम नई दिल्ली के माध्यम से मधुबन आश्रम में रामगढ़ के झुतिया, बोहराकोट और नैकाने की 80 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं को जूस, अचार, सिलाई, कढ़ाई, ऐपण, आर्ट और टोकरी बनाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। महिलाओं के बनाए उत्पादों की बिक्री में भी आश्रम की ओर से मदद की जा रही है। उत्पादों को आसानी से बाजार उपलब्ध होेने से अच्छी आय होने के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। शहद और घी से कैसे स्वरोजगार शुरू हो सकता है, इसके लिए वे राय लेती हैं। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी फोकस कर कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।