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अभिभावकों का शोषण करने वाले स्कूलों को नोटिस भेजें

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उत्तराखण्ड बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी नैनीताल क्लब में अधिकारियों की बैठक लेती - फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। उत्तराखंड बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने निजी विद्यालयों द्वारा शुल्क वृद्धि के नाम पर हो रहे अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर नाराजगी जताई। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर नोटिस जारी करें और यदि नोटिस जारी नहीं कर सकते तो आयोग को ऐसे विद्यालयों की सूची दें जिससे आयोग से उन्हें नोटिस जारी किए जा सकें।
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नैनीताल क्लब में अधिकारियों की बैठक में उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि वह गरीब पात्र बच्चों को नियमानुसार आरटीई के तहत विद्यालयों में प्रवेश दिलाएं। जो प्राइवेट विद्यालय आरटीई के तहत पात्र बच्चों को निशुल्क पढ़ाई की सुविधा नहीं देंगे या उनके साथ दुर्व्यवहार करेंगे तो उनके खिलाफ आयोग सख्त कार्रवाई करेगा।
उन्होंने समाज कल्याण, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल श्रम की समीक्षा करते हुए कहा कि बच्चों के लिए संचालित योजनाओं को सभी विभाग मिलकर धरातल पर उतारें। बैठक में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य सीमा डोरा, एडीएम एसएस जंगपांगी, सीएमओ डॉ.भारती राणा, एसीएमओ डॉ.टीके टम्टा, मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता, जिला समाज कल्याण अधिकारी अमन अनिरुद्ध, सीओ विजय थापा आदि थे।
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निजी विद्यालय से छात्रा की टीसी दिलाने के निर्देश
नैनीताल। आयरपाटा निवासी फिरोज और उनकी पत्नी डौली ने आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी के समक्ष शिकायत की कि एक प्रतिष्ठित कॉलेज प्रबंधन उनकी पुत्री की टीसी नहीं दे रहा है। बेटी ने वहां पहली से चौथी कक्षा तक पढ़ाई की, तब विद्यालय ने फीस में छूट दी थी। इसी साल मार्च में विद्यालय प्रबंधन ने उनसे पूरी फीस के रूप में 80 हजार रुपये जमा कराने को कहा। उन्होंने किस्तों में साठ हजार रुपये जमा किए और शेष राशि जमा नहीं करा पाने के कारण टीसी की मांग की। आयोग की अध्यक्ष ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि वह निजी कॉलेज से टीसी दिलवाएं।
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