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Haldwani: सेहत से खेल रहे मिलावटखोर, मसालों में मिला आर्सेनिक; पनीर में हानिकारक फैट, जांच में दस सैंपल फेल

Thu, 22 Aug 2024 01:21 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मार्च 2024 से जुलाई 2024 तक खाद्य पदार्थों के 145 सैंपल लिए। इनमें से 104 सैंपल की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में दूध के दो, दही और खोया के एक-एक सैंपल अधोमानक पाए गए हैं।
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धनिया - फोटो : Freepik
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विस्तार
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अधिक मुनाफा कमाने के लिए दुकानदार मिलावट कर आपकी सेहत से खेल रहे हैं। शुद्धता की गारंटी के विज्ञापन के दौर में पनीर, मसाले, तेल आदि सुरक्षित नहीं है। जिलेभर से लिए गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। पनीर की जांच में हानिकारक फैट पाया गया है। सात सैंपल अधोमानक और छह सैंपल मिस ब्रांड निकले हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी को नोटिस भेजा है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मार्च 2024 से जुलाई 2024 तक खाद्य पदार्थों के 145 सैंपल लिए। इनमें से 104 सैंपल की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में दूध के दो, दही और खोया के एक-एक सैंपल अधोमानक पाए गए हैं। नैनीताल की दुकान में बिक रहे खुले पनीर में हानिकारक फैट मिला है। वहीं पतंजलि न्यूट्रेला सोया, बरेली स्थित बीएल एग्रो लिमिटेड का सरसों का तेल, तेजस फूड्स की सफेद ब्रेड भी अधोमानक पाई गई है। छह सैंपल मिस ब्रांड पाए गए हैं। ब्रांड में जो न्यूट्रिशियन जितनी मात्रा में दिखाया गया है, वह है ही नहीं। जिला अभिहीत अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि पनीर में मिला फैट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया है। सभी को नोटिस भेजा गया है।

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आर्सेनिक से कैंसर का खतरा: डॉ. कांडपाल
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कांडपाल बताते हैं कि आर्सेनिक, कीटनाशक, लेड और कैडमियम मिले खाद्य पदार्थों के सेवन से कैंसर का खतरा हो सकता है। आर्सेनिक से मूत्राशय, फेफड़े और त्वचा कैंसर, हृदय एवं फेफड़े संबंधी रोग, मधुमेह आदि दिक्कत हो सकती है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नीलांबर भट्ट के अनुसार आर्सेनिक एक तरह का धीमा जहर है जो किडनी, नसों और दिमाग पर असर डालता है। लंबे समय तक केमिकलयुक्त मसालों या उत्पाद का सेवन करने से कैंसर होने की आशंका रहती है। साथ ही लीवर और किडनी भी खराब हो सकती है। आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानून और रेगुलर सैंपलिंग की जरूरत है।

टिन-भोजन में मौजूद कार्बनिक अम्लों के साथ अभिक्रिया करता है। इसके कारण यह खाद्य पदार्थ में घुल सकता है और भोजन को जहरीला बना सकता है।

कीटनाशक-अत्यधिक कीटनाशक अवशेषों वाला भोजन लेने से स्वास्थ्य में तीव्र या दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। तीव्र विषाक्तता के लक्षणों में उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, चक्कर आना और सुन्न होना शामिल हैं। गंभीर मामलों में, लोगों को सांस लेने में कठिनाई, धुंधली दृष्टि और ऐंठन भी हो सकती है।

कैडमियम- कैडमियम को कैंसरकारी, उत्परिवर्तनकारी तथा प्रजनन के लिए विषाक्त माना जाता है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से मनुष्यों में गुर्दे की क्षति तथा हड्डियों की कमजोरी होती है।

लेड- लेड शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता है जिसमें मस्तिष्क, तंत्रिकाएं, किडनी, लिवर, रक्त, पाचन तंत्र और यौन अंग शामिल हैं।

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नैनीताल में खुले में बिक रही खाद्य सामग्री
खाद्य सुरक्षा विभाग की लापरवाही के चलते नगर में कई दुकानदार खुले में खाद्य सामग्री बेचकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। पर जिम्मेदार विभाग मिलावट रोकने के लिए केवल त्योहार के मौके पर औपचारिकता मात्र के लिए नमूने भरे रहे हैं।

बीते एक-दो सालों से नैनीताल में रेस्टोरेंट और खाद्य सामग्री बेचने वाले फड़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कमाई के चक्कर में खाद्य सामग्री बेचने वाले गुणवत्ता को ताक पर रख लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कुछ समये पहले कुमाऊं आयुक्त को एक रेस्टोरेंट में गंदगी व सब्जी के ऊपर कॉकरोच घूमते मिले थे। तब कार्रवाई भी हुई थी। अब फिर से कुछ रेस्टोरेंट और फड़ों में सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। कई फड़ों में धूल आदि रोकने के इंतजाम नहीं हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अभय सिंह ने बताया कि जल्द खाद्य सामग्रियों के नमूने भरे जाएंगे। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी।
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