नैनीताल शहर के लिए 96 करोड़ रुपये की लागत से सीवर ट्रीटमेंट परियोजना के तहत रूसी में बन रहे प्लांट की तलहटी में एक बार फिर भूकटाव शुरू हो चुका है। जिसके चलते बरसात में एसटीपी के साथ रूसी गांव को खतरा होने की आशंका बनी हुई है।
नैनीताल शहर के लिए 96 करोड़ रुपये की लागत से सीवर ट्रीटमेंट परियोजना के तहत रूसी में बन रहे प्लांट की तलहटी में एक बार फिर भूकटाव शुरू हो चुका है। जिसके चलते बरसात में एसटीपी के साथ रूसी गांव को खतरा होने की आशंका बनी हुई है। हांलाकि बचाव के लिए भूकटाव प्रभावित क्षेत्र को तिरपाल से ढंक दिया है। लेकिन ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है।
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उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी की ओर से नैनीताल के सीवर ट्रीटमेंट के लिए 96.15 करोड़ की लागत से कार्य किया जा रहा है। जिसके तहत नगर में नई सीवर लाईन बिछा दी गई है। साथ ही रूसी गांव में एसटीएपी प्लांट का कार्य जारी था। लेकिन बीते वर्ष भूस्खलन के चलते प्लांट खतरे की जद में आ गया। ग्रामीणों के विरोध के बाद कार्यदायी संस्था को एसटीपी का काम भी बंद करना पड़ा। जिसके बाद कार्यदायी संस्था ने एसटीपी के लिए पटवाडांगर में जमीन खोजकर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया। लेकिन मंगलवार रात भारी बारिश के चलते एक बार फिर प्लांट की तहहटी में भूकटाव शुरू हो चुका है। जो भारी बरसात के दौरान बड़ी समस्या बन सकता है और प्लांट के साथ रूसी गांव को भी नुकशान पहुंचा सकता है। वहीं ग्रामीणों की ओर से क्षेत्र की सुरक्षा की मांग की गई है।
एडीबी परियोजना प्रबंधक नीरज उपाध्याय ने बताया कि प्लांट के बचाव के लिए स्टाफ क्वाटर की तलहटी में सुरक्षा दीवारें लगाई गई थीं। बारिश को देखते हुए भूकटाव संभावित क्षेत्र को तिरपाल से ढंक दिया है। शासन को एसटीपी के बचाव कार्य के लिए 40 करोड़ का स्टीमेट बनाकर भी भेजा गया है जो शासन स्तर पर लंबित है।