हल्द्वानी। नगर में नए क्षेत्र शामिल होने के बाद निगम की आय में मात्र 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि निगम क्षेत्र में सफाई कर्मियों की संख्या बढ़कर एक हजार हो गई है। अब नगर निगम ने शासन को पत्र भेजा है। पत्र में निगम की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अस्थाई सफाई कार्मिकों का बढ़ा हुआ मानदेय देने में असमर्थता जताई है। साथ ही शासन से राज्य वित्त (एसएफसी) की राशि बढ़ाने की मांग की गई है।
नगर निगम की ओर से शहरी विकास निदेशालय को पत्र भेजा है। मेयर ने भी शहरी विकास मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र सौंपा है। पत्र में कहा है कि साल 2018 में नगर निगम में 27 नए वार्ड जोड़े गए। मुख्यमंत्री ने घोषणा के तहत इन नए वार्डों में भवन कर, स्वच्छता कर नहीं लगाया जाना है। इस कारण निगम की आय नहीं बढ़ी। इन चार सालों में निगम की आय में मात्र 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस कारण नए वार्डों में विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री घोषणा के तहत अस्थाई सफाई कार्मिकों का मानदेय प्रतिदिन 267 से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। साथ ही इस राशि का भुगतान निगम को अपनी आय से करने के लिए कहा गया है। यहां करीब एक हजार कर्मी हैं। नगर निगम बढ़ा हुआ मानदेय देने में पूरी तरह असमर्थ है। निगम ने शासन से एसएफसी की धनराशि बढ़ोतरी की मांग की है जिससे इन सफाई कर्मिकों का बढ़ा हुआ मानदेय का भुगतान किया जा सके।
निगम ने ये भी मांगा -
- निगम क्षेत्र में बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर लगे हैं। ऐसे में बिजली विभाग के राजस्व का तीन प्रतिशत के बराबर की राशि निगम को दी जाए।
- निगम क्षेत्र में होने वाले रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी का दो प्रतिशत पूर्व की भांति नगर निगम को दिया जाए।
- गैस पाइपलाइन से प्रत्येक घरों को गैस दी जानी है। ऐसे में प्रति कनेक्शन 50 रुपये प्रतिमाह नगर निगम को दिया जाए।
- नगर निगम के क्षेत्र में ऐसी सेवाएं जिसके लिए जमीन के अंदर से संसाधन ले जाए जाते हैं, उन पर प्रति कनेक्शन 50 रुपये प्रतिमाह दिया जाए।
कोट-
-मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री और शहरी विकास निदेशालय को पत्र भेजकर शासन से एसएफसी की धनराशि बढ़ाने की मांग की गई है।
-जोगेंद्र रौतेला मेयर नगर निगम
नगर निगम का पत्र आया है। इसमें निगम की आय का हवाला देते हुए अस्थाई सफाई कर्मियों का बढ़ा हुआ मानदेय देने में असमर्थता जताई गई है। साथ ही शासन से एसएफसी की राशि बढ़ाने की मांग भी की गई है।
-ललित मोहन रयाल, निदेशक शहरी विकास विभाग