हल्द्वानी/लालकुआं। बिंदुखत्ता में दुर्लभ लाल मूंगा खुखरी सांप दिखाई दिया। यह सांप बिंदुखत्ता क्षेत्र (तराई पूर्वी वन प्रभाग) के खुरियाखत्ता निवासी कविंद्र सिंह कोरंगा के घर में मिला है। वन विभाग की टीम ने सांप को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया है। इससे पूर्व यह दुर्लभ सांप छह साल पहले तराई पूर्वी वन प्रभाग के सुरई रेंज में दिखाई दिया था।
खुरियाखत्ता निवासी कविंद्र सिंह ने बताया कि सुबह जब डेयरी से जुड़े काम के बाद लौटे थे, तो उनके घर के पास भीड़ लगी थी, वहां पर यह सांप दिखाई दिया। उन्होंने पहली बार ऐसा सांप देखा था, सुरक्षा की दृष्टि से सांप को एक बोरे में करने के बाद वन विभाग की टीम को सूचित किया गया। बाद में गौला रेंज के वन कर्मी हरीश पहुंचे और सांप को रेस्क्यू कर ले गए।
तराई पूर्वी वन प्रभाग डीएफओ नीतिशमणि त्रिपाठी ने बताया कि यह दुर्लभ लाल मूंगा सांप है। मुख्य वन संरक्षक डॉ. पराग मुधकर धकाते ने बताया कि यह सांप पहली बार छह साल पहले तराई पूर्वी वन प्रभाग के सुरई रेंज में दिखाई दिया था। तब यह सांप वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम को मृत मिला था। 2015 में इसी टीम को जिंदा कई सांप मिले थे।
एसडीओ ध्रुव मर्तोलिया ने बताया कि खुरियाखत्ता में मिले सांप को रेस्क्यू करने के बाद जंगल में छोड़ दिया है।
बरसात के समय ही रिपोर्ट हुआ था सांप
हल्द्वानी। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून में नमामि गंगे के प्रोजेक्ट एसोसिएट व वन्यजीव विशेषज्ञ विपुुल मौर्या ने बताया कि यह सांप उनकी टीम को 2014 में मृत मिला था। इसके एक साल बाद पांच जिंदा सांप सुरई रेंज में मिले थे। बताया कि यह सांप अक्सर बरसात के समय ही दिखाई देता है। पांच साल पहले भी बरसात के समय यह दिखाई दिया था। बरसात में बिल में पानी भरने पर वह बाहर आ जाता है। इसका वास स्थल तराई है। इस सांप के बारे में बहुत ही कम जानकारी है। अभी तक चार बार ही दिखाई दिया है।
1936 में पहली बार दिखाई दिया था सांप
हल्द्वानी। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून में नमामि गंगे के प्रोजेक्ट एसोसिएट विपुल मौर्या ने बताया कि पहली बार यह सांप 1936 में तत्कालीन नार्थ खरी डिविजन में दिखाई दिया था।