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रेंजर हरीश पांडे: क्या था दबाव, हर किसी के जेहन में एक ही सवाल, कौन लाएगा मौत का पूरा सच सामने

Thu, 14 Dec 2023 12:20 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

वन क्षेत्राधिकारी हरीश चंद्र पांडे का शव बरामद होने की सूचना मिलने से ऊंचापुल क्षेत्र में सनसनी फैल गई। रेंजर के घर में मातम पसरा है। रेंजर हरीश पांडे की पत्नी पूर्णिमा पांडे और मां कमला पांडे सदमे में हैं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। 
 
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हरीश चंद्र पांडे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तराई केंद्रीय वन प्रभाग की भाखड़ा रेंज के रेंजर हरीश चंद्र पांडे किस दबाव में थे जिसके चलते वह 29 नवंबर की शाम को अचानक गायब हो गए और भीमताल पहुंच गए। पेड़ कटने का दबाव था या कोई जांच रिपोर्ट बदलने के लिए दबाव डाला जा रहा था। यह तो जांच के बाद ही साफ होगा। हालांकि विभागीय अधिकारी किसी भी विभागीय दबाव से इनकार कर रहे हैं। 

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हरीश चंद्र पांडे सरल और मिलनसार व्यक्ति थे। उन्होंने वन विभाग में करीब 36 साल की नौकरी पर्वतीय क्षेत्र में ही की। करीब दो साल पहले उनकी पोस्टिंग मैदानी क्षेत्र में हुई। वह तराई केंद्रीय वन प्रभाग में थे। विभागीय सूत्रों के अनुसार मैदानी क्षेत्र का अनुभव कम होने के कारण कुछ वन कर्मियों ने तस्करों के साथ मिलकर सागौन के 10 पेड़ व खैर के 12 पेड़ काट दिए थे। इस कारण वे दबाव में थे। उन पर तस्करों को पकड़ने का दबाव था। 22 नवंबर को मामले में मुकदमा भी दर्ज किया गया। पेड़ों के कटान की विभागीय जांच भी शुरू हो गई थी। 

विभागीय सूत्रों का यह भी कहना है कि तराई केंद्रीय वन प्रभाग की एक अधिकारी के काम में कुछ समय पूर्व भारी अनियमितता पाई गई थी जिसके बाद उस अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया था। सस्पेंशन मामले की जांच चल रही है। ऐसे में रेंज से अनियमितता वाले कामों पर मुख्यालय से रिपोर्ट मांगी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि एक वन अधिकारी का उन पर अनियमितता न दिखाते हुए क्लीन चिट देने वाली रिपोर्ट बनाने का दबाव था। 
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हालांकि तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ हिमांशु बागरी से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि वन संरक्षक ने जिस आधार पर रेंजर को सस्पेंड किया था। उन बिंदुओं में रिपोर्ट मांगी थी। उन बिंदुओं को जांचने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। उस कमेटी में रेंजर हरीश चंद्र पांडे को नहीं रखा गया था। तो जांच रिपोर्ट मामले में दबाव की बात गलत है।
 

घटनाक्रम पर एक नजर
  • भाखड़ा रेंज में तैनात रेंजर हरीश चंद्र पांडे 29 नवंबर को कार्यालय आए। घर लौटने के बाद शाम सात बजे घर से निकले। अपना मोबाइल भी वह घर छोड़ गए। 
  • 30 नवंबर को परिजनों ने मुखानी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई
  • पुलिस ने जांच शुरू की तो रेंजर कमलुवागांजा-गुरुकुल स्कूल वाली सड़क पर जाते दिखे। उसके बाद सीसीटीवी में ब्लॉक आफिस के पास देखे गए। वहांं से भोलानाथ गार्डन के पास स्थित स्टैंड पर टेंपो से उतरे।
  • वहां से कालूसिद्ध मंदिर के पास पैदल जाते दिखे। इसके बाद वे दोबारा टेंपो में सवार हुए। वहां से भोटियापड़ाव टैक्सी स्टैंड पहुंचे। उसके बाद टैक्सी में 
  • बैठते दिखे। 
  • देर शाम टैक्सी भीमताल पहुंची और रेंजर टैक्सी से उतरते दिखे। 
  • 29 नवंबर को अंतिम बार रात 8:53 बजे भीमताल थाने के पास दिखे। सीसीटीवी में उनके साथ साथ कोई अन्य नहीं दिखाई दिया। तब से उनका कोई पता नहीं चल सका।
  • 13 दिसंबर को भीमताल झील से उनका शव बरामद हुआ।
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शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम में शरीर पर कहीं चोट के निशान नहीं मिले हैं। बिसरा सुरक्षित रखा गया है। बिसरे की जांच के बाद ही मौत के कारणों का पता चलेगा। एसपी क्राइम जगदीश चंद्र ने बताया कि पोस्टमार्टम करा दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों का पता चलेगा। कहा कि प्रथमदृष्टया शरीर पर कहीं चोट के निशान नहीं मिले हैं। पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
पोस्टमार्टम करने वाले एक डॉक्टर ने बताया कि सामान्य तापमान में शव 16 से 20 घंटे में डी-कंपोजिशन शुरू हो जाता है। शव के अंदर गैस बनने लगती है। पानी में गिरने पर शव 24 घंटे में गैस भरने के कारण ऊपर आ जाता है। झील का पानी ठंडा होगा। इस कारण डी-कंपोजिशन देर से शुरू हुआ होगा। बताया कि अभी तक यह स्टडी नहीं है कि ठंडे पानी में शव को डी-कंपोजिशन होने में कितना समय लगता है। 

पुलिस भी कठघरे में
बेटे हितार्थ ने पुलिस पर पिता की तलाश में गंभीरता नहीं बरतने का जो आरोप लगाया है, उसे लेकर मौके पर जमा लोग भी सहमत नजर आए। लोगों का कहना है कि जब रेंजर की लास्ट लोकेशन भीमताल में मिली थी तो पुलिस उन्हें क्यों नहीं तलाश सकी। शहर में कई जगह कैमरे लगे हंै। अगर इन कैमरों का बारीकी से अध्ययन किया गया होता तो शायद आज उनके पिता जिंदा होते।

पहले भी कटे हैं पेड़, सबके लिए नियम हैं बराबर
तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा कि पेड़ कटने को लेकर विभागीय प्रक्रिया अपनाई गई थी। पेड़ कटने पर एक ही अधिकारी-कर्मचारी जिम्मेदार नहीं होता है। टीम ने बरेली से माल भी बरामद कर लिया है। इस मामले में जांच चल रही है। इससे पहले भी कई बार पेड़ कटे हैं। इस पर दबाव की बात नहीं है।
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