रामनगर स्वतंत्रता सेनानी मोती सिंह नेगी का फाइल फोटो।
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रामनगर (नैनीताल)। रामनगर के अंतिम स्वतंत्रता सेनानी मोती सिंह नेगी का शुक्रवार शाम घर पर निधन हो गया। आज सुबह दस बजे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित अन्य लोगों ने शोक जताया है।
स्वतंत्रता सेनानी 99 वर्षीय मोती सिंह नेगी मूल रूप से ग्राम कनोली पोस्ट ऑफिस कनोली ब्लॉक ताड़ीखेत अल्मोड़ा के रहने वाले थे। वर्तमान में वह रामनगर की कोटद्वार रोड में परिवार के साथ रहते थे। स्वतंत्रता सेनानी तीन पुत्र और एक पुत्री का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए। उनका सबसे बड़ा पुत्र भगवत सिंह गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और दूसरे नंबर के पुत्र भूपाल नेगी महाविद्यालय के प्राचार्य पद से रिटायर हुए हैं, जबकि सबसे छोटा बेटा पूरन नेगी सूरत में कंपनी में कार्यरत है। वहीं, बेटी भिकियासैंण में पोस्ट ऑफिस में कार्यरत है। एसडीएम विजयनाथ शुक्ल ने बताया कि रामनगर के स्वतंत्रता सेनानी मोती सिंह नेगी का निधन हो गया है। आज राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पढ़ाई लिखाई छोड़कर कूदे थे आंदोलन में
परिजनों के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोती सिंह नेगी कक्षा पांच से पढ़ाई छोड़कर अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में कूद गए थे। वह खुद भी रानीखेत से जुलूस के साथ झांसी पहुंच गए। झांसी में शीर्ष नेताओं के नेतृत्व में जुलूस निकाला तो उन्हें और उनके साथियों को झांसी की जेल में बंद कर दिया गया। पकड़े गए लोगों को छोड़ने के लिए माफीनामा लिखने को कहा गया, लेकिन उन्होंने माफीनामा लिखने से मना कर दिया। एक सितंबर 1942 को सभी लोगों को छह माह की सजा सुनाई गई। साथ ही जेल में काफी प्रताड़ित किया गया। उनके साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया गया तो उन्होंने सात दिन तक खाना नहीं खाया। 27 फरवरी 1942 को मोती सिंह जेल से छूटकर आए। इसके बाद भी आंदोलनों में सक्रिय रहे। मोती सिंह नेगी को वर्ष 2008 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल दिल्ली बुलाकर सम्मानित भी कर चुकी हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था।