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डाक कर्मचारी दो दिन हड़ताल पर, दस करोड़ से अधिक का लेन- देन प्रभावित

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आयकर कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करते आयकर कर्मी। विज्ञप्ति - फोटो : HALDWANI
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हल्द्वानी। नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल एंप्लाइज के दो दिनी हड़ताल के आह्वान पर डाक कर्मचारियों ने सोमवार को प्रधान डाकघर परिसर में धरना देकर प्रदर्शन किया। नैनीताल मंडल के डाकघरों में कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने के कारण कामकाज ठप रहा। डाक कर्मियों की हड़ताल से दस करोड़ से अधिक का लेनदेन प्रभावित हुआ।
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देशव्यापी आह्वान पर स्थानीय डाक विभाग के कर्मियों ने भी सोमवार से दो दिनी हड़ताल कर दी है। डाक कर्मचारी संघ ग्रुप सी के बैनर तले प्रधान डाकघर परिसर में आहूत धरनास्थल पर वक्ताओं ने निजीकरण का नारेबाजी कर विरोध किया। ब्रांच यूनियन अध्यक्ष जितेंद्र मर्तोलिया ने कहा कि नई पेंशन योजना को निरस्त कर सरकार को तत्काल पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना करना चाहिए। उन्होंने अव्यावहारिक व्यवसायिक लक्ष्य बंद करने समेत कई मुद्दों पर आवाज उठाई। संघ के प्रांतीय सचिव विनय ढौंडियाल ने कहा कि मांगों को सरकार ने जल्द पूर्ण नहीं किया तो भविष्य में भी इस तरह के आंदोलन करने के लिए कर्मचारी बाध्य होंगे। कहा कि जनवरी 2020 से डीए का भुगतान रोका गया है। एरियर के रूप में जल्द भुगतान किया जाए। धरने में कामरेड भूपाल बिष्ट, एलएम जोशी, पोस्टमैन यूनियन के प्रांतीय सचिव बाबू राम दिवाकर के नेतृत्व में कामरेड चित्रा जोशी, राहुल पंत, प्रदीप उप्रेती, नरेश शर्मा, गोपाल रावत के अलावा कई उपडाकघरों से आए कर्मचारियों ने हल्द्वानी प्रधान डाकघर में हड़ताल में प्रतिभाग किया।
ये हैं मांगें
- डाकघरों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए।
- जीडीएस कर्मचारियों के लिए गठित कमलेश चंद्र कमेटी की बाकी सिफारिशें लागू की जाए।
- 18 महीने के देय महंगाई भत्तों के भुगतान पर रोक को खत्म किया जाए।
- डाक लेखा कार्यालयों के विकेंद्रीकरण को बंद किया जाए।
- सर्किल आफिस एवं एसबीसीओ के सहायकों का डाक सहायक कैडर में मर्ज करने के प्रस्ताव को समाप्त किया जाए।
नए श्रम कोड कानून रद्द करने की मांग, सड़क पर उतरे कर्मी
हल्द्वानी। नए श्रम कोड कानून रद्द करने, निजीकरण के विरोध, पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों के बैनर तले कर्मचारियों ने कार्यालयों पर प्रदर्शन किया। इसके अलावा बुद्ध पार्क तक जुलूस निकालकर नारेबाजी की। हड़ताल का बाजार, बैंक, रोडवेज बस संचालन आदि पर कोई असर नहीं दिखा।
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माले के राज्य सचिव राजा बहुगुुणा ने कहा कि मौजूदा निजाम बांटो और राज करो की नीति पर चल रहा है। एक्टू के राज्य सचिव केके बोरा और उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के महामंत्री कैलाश पांडे ने कहा कि देश को बचाने के लिए यह हड़ताल है। सनसेरा श्रमिक संगठन के अध्यक्ष दीपक कांडपाल ने नए श्रम कानूनों से कर्मचारियों का उत्पीड़न और बढ़ेगा। वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने तमाम श्रम कानूनों को ही खत्म कर दिया है और इनकी जगह चार श्रम कोड कानून बना दिए हैं। जिन्हें वह लागू करने की पूरी तैयारी में है। यह मजदूरों की गुलामी के कोड हैं। इससे पूर्व उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के बैनर तले आशा वर्कर्स ने महिला अस्पताल से जुलूस निकाला। इसी तरह बीमा कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मियों ने जुलूस निकाला और नारेबाजी करते हुए सभा स्थल तक पहुंचे। आयकर विभाग के कर्मचारियों ने भी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान सहायक जोनल सचिव धीरज कुमार, टीसी जोशी, भवानी शंकर शर्मा, अपूर्वा चान्याल, प्रमोद पांगती आदि थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड मेडिकल सेल्स रिप्रिजेनटेटिव एसो. के बैनर तले मेडिकल रिप्रिजेनटेटिव भी हड़ताल पर रहे। वह रमन मार्केट में एकत्र हुए और बुद्ध पार्क में आयोजित सभा स्थल पर पहुंचे। सभा का संचालन एक्टू के हल्द्वानी नगर अध्यक्ष जोगेंद्र लाल ने किया।
ये रहे मौजूद
गौरव गोयल, मनोज कुमार गुप्ता, डॉ. कैलाश, बीपी उपाध्याय, ललतेश प्रसाद, जिया उल हक, मनोज आर्य, ललित मटियाली, सरोज रावत, रीना बाला, आनंद नेगी, जिया उल हक, गोविंदी लटवाल, सरिता साहू, पुष्पा राजभर, हेमा तिवारी, रुखसाना बेगम, हंसी फुलारा आदि।
यं प्रमुख मांगे हैं
- श्रमिक विरोधी चारों श्रम कोड कानून रद्द हो।
- देश की सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण पर रोक लगे।
- एलआईसी का आईपीओ वापस लिया जाए।
- बैंकों के निजीकरण की कोशिशें बंद करते हुए आईडीबीआई बैंक को निजी हाथों में सौंपने के प्रयास बंद हों।
- आशा समेत सभी स्कीम वर्कर्स को नियमित करते हुए वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाये।
- 26000 न्यूनतम वेतन व 10000 रुपये मासिक पेंशन लागू की जाय।
- पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाये।
- बढ़ती बेरोजगारी को रोकने के लिए खाली पड़े पदों पर तत्काल भर्ती की जाये
- श्रम अधिकारों, नियमितीकरण और समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी की जाये।
- उपनल कर्मचारियों को समान काम समान वेतन दिया जाय।
- निर्माण मजदूरों का निर्माण बोर्ड में पृथक पंजीकरण पुन: शुरू किया जाय।
यह संगठन हड़ताल में शामिल रहे
हल्द्वानी। एक्टू, बीमा कर्मचारी संघ, बैंक यूनियन एआईबीओए, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, यूनियन बैंक ऑफिसर्स स्टॉफ एसोसिएशन, सनसेरा श्रमिक संगठन, भाकपा (माले), आइसा, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन, सीटू, पंजाब बेवल गियर्स वर्कर्स यूनियन, बीएसएनएल कैजुअल एंड कांट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रगतिशील भोजनमाता यूनियन, उत्तराखंड निर्माण मजदूर यूनियन, अखिल भारतीय किसान महासभा, परिवर्तनकामी छात्र संगठन आदि के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
हड़ताल पर गये कर्मचारी संगठनों से बातचीत
एलआईसी में आईपीओ लागू कर निजीकरण का रास्ता तैयार किया जा रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नये लेबर कोड को तत्काल निरस्त किया जाए। नयी पेंशन स्कीम को रद्द कर पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए। सरकारी नौकरियों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को शीघ्र भरा जाए। - मनोज कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, बीमा कर्मचारी संघ
केंद्र सरकार बैंक, एलआईसी और अन्य सरकारी कंपनियों का निजीकरण कर रही है। एलआईसी को आईपीओ के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। जो 42 करोड़ बीमाधारकों के साथ विश्वासघात है। एलआईसी स्वयं सक्षम है, बाहर से पूंजी जुटाने की कोई आवश्यकता नही है। 1956 में 5 करोड़ की शुरूआती पूंजी से शुरू हुई एलआईसी वर्तमान में 49 लाख करोड़ पूंजी जुटा चुकी है। - भानु प्रकाश उपाध्याय, भूतपूर्व अध्यक्ष, बीमा कर्मचारी संघ
आशा कार्यकत्रियों पर सरकारी काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। काम के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है। समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। हड़ताल का मकसद आशा कार्यकत्रियों की आवाज को सरकार तक पहुंचाना है। - सरोज रावत, आशा हेल्थ वर्कर
16 साल से अधिक समय से आशा हेल्थ वर्कर के रूप में सेवाएं दी, मगर अभी तक नियमित नही किया गया है। जो आशा कार्यकत्री लंबे समय से काम कर रही हैं, उन्हें बेसिक पे पर नियमित किया जाए। पुरानी पेंशन योजना का लाभ भी आशा कार्यकत्रियों को दिया जाए। -चंपा मंडोला, आशा हेल्थ वर्कर
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