उत्तराखंड छोटा सा राज्य है। इस राज्य की तुलना अन्य राज्यों से नहीं की जा सकती है। पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां आमजन की राय को देखते हुए स्थायी हाईकोर्ट स्थापित की गई। ऐसे में यहां से बेंच को अन्यत्र ले जाने का कोई औचित्य ही नहीं है। जहां तक वादकारियों को सुलभ न्याय का प्रश्न है, सुप्रीम कोर्ट की ओर से इसके लिए सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। उनके माध्यम से तकनीकी प्रणाली से सुलभ न्याय के प्रयास किए जा रहे हैं। बेंच विस्थापन की बजाए हाईब्रि़ड प्रणाली को बेहतर करना होगा।
-पूरन सिंह बिष्ट, पूर्व अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन।
हाईकोर्ट की बेंच के स्थानांतरण का पुरजोर विरोध किया जाएगा। बुधवार को बेंच के स्थानांतरण की कवायद की सूचना पर बार ने त्वरित बैठक बुलाकर विरोध दर्ज किया। भविष्य में भी इस तरह की कवायद का विरोध किया जाएगा। हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार इस तरह पुलिस फोर्स पहुंची। बार ने इसका कारण जानना चाहा तो फोर्स को बुलाने बाबत स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। अधिवक्ता कानून को जानने के साथ ही अपने अधिकारों को भी जानते हैं। भविष्य में फोर्स के परिसर में प्रवेश का भी हर संभव विरोध किया जाएगा।
- दिनेश चंद्र सिंह रावत, अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन।
यूपी में मेरठ के अधिवक्ताओं की बैंच स्थापित करने की मांग थी, वह अभी तक पूरी नहीं हुई है। उत्तराखंड में बैंच की कोई जरूरत नहीं है।
-अवधेश चौबे, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन
यह न्यायोचित नहीं होगा। इससे गरीब आदमी की परेशानी बढ़ेगी। केस ट्रांसफर होगा तो सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
- कमल सक्सेना