नैनीताल। जिला पंचायत अध्यक्ष के जाली शासकीय लेटरहेड और कथित फर्जी हस्ताक्षरों से व्हाट्सएप ग्रुप में पत्र प्रसारित करने के मामले में अदालत ने प्रमोद सिंह तोलिया को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट/प्रथम अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) उर्वशी रावत की अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने आईपीसी की धारा 466, 468 और 469 के तहत लगाए गए आरोपों के आवश्यक तत्व भी साबित नहीं पाए।
मामला वर्ष 2021 में जिला नियोजन समिति के चुनाव के दौरान का है। आरोप था कि जिला पंचायत अध्यक्ष के शासकीय लेटरहेड पर उनके कथित हस्ताक्षर वाला पत्र जिला पंचायत सदस्यों के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजा गया था। पत्र में एक राजनीतिक दल के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील किए जाने की बात सामने आई थी। तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य निवेदिता जोशी की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के स्तर से कार्रवाई के बाद थाना तल्लीताल में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के बाद पुलिस ने प्रमोद सिंह तोलिया के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान पांच अभियोजन साक्षियों के बयान हुए। शिकायतकर्ता निवेदिता जोशी अपने पूर्व बयानों और व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट की पुष्टि नहीं कर सकीं और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। जिस मोबाइल और सिम से संदेश भेजे जाने का आरोप था, उसे एफएसएल जांच के लिए नहीं भेजा गया। कथित फर्जी हस्ताक्षरों का हस्तलेख विशेषज्ञ से परीक्षण भी नहीं कराया गया। व्हाट्सएप ग्रुप के अन्य सदस्यों को भी गवाह नहीं बनाया गया। अदालत ने साक्ष्य अपर्याप्त मानते हुए उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया और जमानती बंधपत्र निरस्त करने के आदेश दिए।