फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haldwani: अब मलिक का जेल से बाहर निकलना मुश्किल, इस धारा में मिल सकती है उम्रकैद की सजा; जानें क्या है यूएपीए

Tue, 27 Feb 2024 02:18 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

Haldwani News: अब्दुल मलिक पर यूएपीए भी लगाया गया है। इस धारा के तहत पुलिस मलिक को 30 दिन की पुलिस हिरासत में ले सकती है। बशर्ते कोर्ट में उसे सिद्ध करना पड़ेगा कि मलिक पर यूएपीए क्यों लगाया गया। कैसे वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।
विज्ञापन
अब्दुल मलिक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अब्दुल मलिक पर यूएपीए भी लगाया गया है। इस धारा के तहत पुलिस मलिक को 30 दिन की पुलिस हिरासत में ले सकती है। बशर्ते कोर्ट में उसे सिद्ध करना पड़ेगा कि मलिक पर यूएपीए क्यों लगाया गया। कैसे वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।

जानें क्या है यूएपीए -

विज्ञापन

यूएपीए को वर्ष 1967 में लागू किया गया था। इसे वर्ष 2004 और वर्ष 2008 में आतंकवाद विरोधी कानून के रूप में संशोधित किया गया। अगस्त 2019 में संसद ने कुछ आधारों पर व्यक्तियों को आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए यूएपीए (संशोधन) बिल, 2019 को मंजूरी दी।

एडवोकेट पंकज कबडवाल ने बताया कि यूएपीए के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है जो आतंकी गतिविधियों में संदिग्ध होते हैं। यूएपीए की धारा-15 आतंकी गतिविधि को परिभाषित करती है। इस कानून के तहत कम से कम पांच साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अगर आतंकी घटना में किसी की जान चली जाती है तो दोषी व्यक्ति को सजा-ए-मौत या फिर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अगर कोई भी व्यक्ति आतंक फैलाने के मकसद से देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा और संप्रभुता को खंडित करने की कोशिश करता है या फिर देश या देश के बाहर भारतीयों के साथ आतंकी घटना करने की कोशिश करता है तो वह यूएपीए कानून के दायरे में आएगा।

ये पढ़ें- Haldwani: अब्दुल मलिक के बेटे के लिए दिल्ली से भोपाल तक दौड़, 19 दिन में 40 जगह दी दबिश; पुलिस के हाथ खाली

विज्ञापन

इस कानून के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है जो आतंकी गतिविधियों में संदिग्ध होते हैं। यूएपीए कानून राष्ट्रीय जांच एजेंसी को संदिग्ध या फिर आरोपी की संपत्ति जब्त या फिर कुर्क करने का अधिकार देती है। यूएपीए कानून संविधान के अनुच्छेद-19(1) के तहत मौलिक अधिकारों पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के इरादे से पेश किया गया था। यूएपीए का मकसद देश की देश की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार को अधिकार देना है।

विज्ञापन

एडवोकेट सुधांशु तिवारी बताते हैं कि यूएपीए कानून के सेक्शन 43डी (2) के तहत पुलिस हिरासत के समय को दोगुना तक बढ़ा सकती है। इसके तहत 30 दिन की पुलिस हिरासत मिल सकती है। वहीं, न्यायिक हिरासत 90 दिन तक की हो सकती है, जबकि अन्य कानून के तहत हिरासत केवल 60 दिन की होती है। इतना ही नहीं, यूएपीए कानून के तहत केस दर्ज होने पर अग्रिम जमानत नहीं मिलती है। यूएपीए कानून के सेक्शन 43डी (5) के तहत अगर प्रथमदृष्टया उस पर केस बनता है तो अदालत भी उसे जमानत नहीं दे सकती। इसमें सात साल की सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। साथ ही आरोपी की संपत्ति जब्त भी की जा सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें