इस कानून के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है जो आतंकी गतिविधियों में संदिग्ध होते हैं। यूएपीए कानून राष्ट्रीय जांच एजेंसी को संदिग्ध या फिर आरोपी की संपत्ति जब्त या फिर कुर्क करने का अधिकार देती है। यूएपीए कानून संविधान के अनुच्छेद-19(1) के तहत मौलिक अधिकारों पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के इरादे से पेश किया गया था। यूएपीए का मकसद देश की देश की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार को अधिकार देना है।
एडवोकेट सुधांशु तिवारी बताते हैं कि यूएपीए कानून के सेक्शन 43डी (2) के तहत पुलिस हिरासत के समय को दोगुना तक बढ़ा सकती है। इसके तहत 30 दिन की पुलिस हिरासत मिल सकती है। वहीं, न्यायिक हिरासत 90 दिन तक की हो सकती है, जबकि अन्य कानून के तहत हिरासत केवल 60 दिन की होती है। इतना ही नहीं, यूएपीए कानून के तहत केस दर्ज होने पर अग्रिम जमानत नहीं मिलती है। यूएपीए कानून के सेक्शन 43डी (5) के तहत अगर प्रथमदृष्टया उस पर केस बनता है तो अदालत भी उसे जमानत नहीं दे सकती। इसमें सात साल की सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। साथ ही आरोपी की संपत्ति जब्त भी की जा सकती है।