सुशीला तिवारी अस्पताल की बदहाली को लेकर मौन व्रत पर बैठे पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का मौन व्रत आधी रात को 12 बजे मुख्यमंत्री हरीश रावत से बात करने के बाद टूटा।
सीएम ने सभी मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया और कहा कि मै आपका शिष्य हूं एक बार आदेश दिया होता तो हर समस्या का निदान हो जाता।
सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) की अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने बुधवार को राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अस्पताल के सामने मौन व्रत शुरू कर दिया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सुशीला तिवारी अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने प्राचार्य डा. सीएमएस रावत से स्टाफ समेत जरूरी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली थी।
इस दौरान नर्सों, डाक्टरों की कमी, खस्ताहाल एमआरआई और सीटी स्कैन मशीन, कार्डिक यूनिट, आंकोलाजी फिजीशियन और सर्जन की कमी तथा ट्रामा सेंटर की व्यवस्था न होने से वह काफी खिन्न थे। उन्होंने चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत से भी फोन पर बात की।
अव्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने मौन व्रत और धरना देने की बात कही थी। बुधवार दोपहर वह करीब 12.30 बजे एसटीएच के सामने मौन व्रत पर बैठ गए।
उनकी पत्नी डा. उज्जवला तिवारी ने कहा कि इसका कोई राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। अस्पताल में सुविधाओं के लिए तिवारी ने मौन व्रत का निर्णय लिया है।
मौके पर तिवारी को समर्थन देने वालों को दिन भर तांता लगा रहा। पुत्र रोहित शेखर तिवारी भी उनके साथ मौन व्रत पर रहे।
देर शाम तिवारी के मौन व्रत को लेकर शासन में हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मुख्यमंत्री हरीश रावत को दी गई। इस बीच चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत ने तिवारी की तमाम मांगे जल्द पूरी करने की घोषणा कर दी।
मौन व्रत पर बैठे तिवारी को मुख्यमंत्री हरीश रावत और चिकित्सा-शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत के मांग मान लेने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री हरीश रावत से आश्वासन मिलने के बाद ही मौन व्रत खत्म करने का निर्णय लिया था।
रात लगभग 12 बजे रामपुर रोड स्थित एक होटल में आराम करने गए तिवारी से मुख्यमंत्री हरीश रावत की बात हुई। रावत ने कहा कि अगर आपको मौन व्रत रखना है तो राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर रखें।
देश में सांप्रदायिक सौहार्द कायम रहे और अन्य समस्याओं से निजात मिल सके इसको लेकर मौन व्रत कीजिए। इन बातों के लिए राजनीति के लिए तैयार हो रहे आपके शिष्य ही बैठ सकते थे।
उन्होंने कहा कि कृपा करके मौन व्रत तोड़ दीजिए और धरना स्थल से उठ जाइये। आपके मौन व्रत से हम सबको अक्ल आनी होगी तो आ जाएगी।
आपने देश को दिशा देने का काम किया है आपका काम मौन व्रत या धरने पर बैठना नहीं है। आप जो कहेंगे वह हो जाएगा।
मुख्यमंत्री रावत ने तिवारी की पत्नी डा. उज्जवला तिवारी से भी फोन पर बात की। कहा कि आपको तिवारी जी को रोकना चाहिए था।
उनकी आयु अधिक है और ऐसे में सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। भगवान न करे अगर तिवारी जी को कुछ हो जाता न तो आप अपने को माफ कर पातीं और न मैं स्वयं को माफ कर पाता।
रावत ने डा. तिवारी को भी आश्वस्त किया कि सभी मांगें जल्द से जल्द पूरी हो जाएंगी। उन्होंने तिवारी जी को एसटीएच के सामने से उठाने का अनुरोध किया।
दोनों की बात होने के बाद देर रात सभी लोग धरना स्थल से उठ गए। इस दौरान मोहन पाठक, पूर्व दर्जा मंत्री आबिद हुसैन, रईसुल हसन, शकील सलमानी आदि थे।