हल्द्वानी में नागरिकता संसोधन कानून के खिलाफ निकाली जा रही रैली के दौरान उमड़ा जनसैलाब । अमर उ?
हल्द्वानी। शनिवार की सुबह मौसम की आंखमिचौली दिखी, बूंदाबांदी भी हुई। एक बार लगा कि मौसम खराब हो सकता है। बाद में धूप खिली तो सभी ने राहत की सांस ली। कुछ यही हाल शहर के माहौल का भी रहा। जुलूस और लोगों के जज्बात को लेकर एक चिंता अफसरों से लेकर संभ्रांत लोगों में भी थी। कहीं कुछ ऐसा न हो जाए जो हल्द्वानी की साख को धूमिल कर दे।
एक छोटे लम्हे में कुछ लोगों ने रेलवे बाजार से एसडीएम कोर्ट की तरफ जाने की कोशिश की, जिससे माथे पर लकीरें गहरी हो गईं लेकिन संभ्रांत लोगों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए माहौल को काबू कर लिया। एक बार फिर हल्द्वानी के लोगों ने साबित कर दिया कि वे अमन पसंद हैं और दायरे में रहकर अपनी बात को मजबूती से रखना जानते हैं। राष्ट्रगान के बाद सभी अपने घरों को लौट गए।
सीएए और एनआरसी के विरोध को लेकर जुलूस की तैयारियां तीन दिन से जोरों पर थीं। ऐसे में अफसरों में चिंता बनी हुई थी। हर स्थिति से निपटने के लिए एहतियातन भारी पुलिस फोर्स भी बुला लिया गया था लेकिन सभी पुराने वक्तऔर अनुभव के आधार पर मुतमईन भी थे कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा जो हल्द्वानी की साख को नुकसान पहुंचाए। 19 दिसंबर से दिन-रात एक तरफ जहां प्रशासन लोगों से मिलजुलकर शांतिपूर्ण व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपील कर रहा था।
वही अमन के साथ कैसे अपने विरोध को दर्ज कराएं, उसकी तैयारी भी समानांतर बनभूलपुरा क्षेत्र में चल रही थी। असहमति जताने के लिए लोगों ने सड़क पर नारे लिखे, तरह-तरह के पोस्टर बनाए और अपने जज्बात को खुलकर इजहार किया। जुलूस के दौरान एक बार कुछ जज्बाती लोगों ने तय बात से इतर जाने कोशिश की। वे रेलवे बाजार की तरफ से एसडीएम कोर्ट की ओर चल पड़े। हालात कुछ संजीदा हो चले थे, ऐसे में उलमा ने मोर्चा संभाला और उन्हें सख्त लहजे में समझाया, जिससे हुजूम लौट आया। आमतौर पर जुलूस के बाद पुलिस ही लोगों को घर जाने के लिए अनुरोध करती है, लेकिन इस जुलूस में शामिल बड़े बुजुर्ग और सम्मानित लोगों ने खुद ही इसका ध्यान रखा और लोगों को घर जाने की गुजारिश की। वे खुद ही देर तक हर जगह डटे भी रहे।