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सुशीला तिवारी अस्पताल से फिर लौटा दिया गया मरीज

Wed, 19 Jul 2017 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
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कुमाऊं का सबसे बड़ा अस्पताल गरीबों के इलाज करने के बजाए रेफर सेंटर बनता जा रहा है। विभागाध्यक्षों को बिना विश्वास में लिए एनस्थीसिया विभाग के डॉक्टर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर रहे हैं। अस्पताल में चल रही अराजकता और अव्यवस्था पर प्राचार्य और चिकित्सा-शिक्षा निदेशक मूकदर्शक बन तमाशा देख रहे हैं। 
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मुरादाबाद निवासी जयप्रकाश सिंह (45) न्यूरो की समस्या से ग्रस्त थे और इलाज कराने के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल में 22 जून को भर्ती हुए थे। जयप्रकाश को रीढ़ की हड्डी में समस्या थी और मंगलवार को ऑपरेशन होना था।

एनस्थीसिया विभाग के एक डॉक्टर ने अपने विभागाध्यक्ष की अनुमति से जयप्रकाश सिंह को हायर सेंटर रेफर कर दिया। लिखा गया कि सर्जरी के दौरान हृदय रोग और गुर्दा रोग विशेषज्ञ की जरूरत पड़ सकती है। दोनों ही विशेषज्ञ एसटीएच में नहीं है और ऐसे में मरीज को हायर सेंटर ले जाना उचित होगा।
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एक अन्य मरीज राजीव के पिता मुन्ना लाल की रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन भी मंगलवार को होना था मगर एनस्थीसिया विभाग से अनुमति न मिलने के कारण ऑपरेशन टाल दिया गया। 

26 मार्च 17 को अल्मोड़ा निवासी सुरेश चंद्र भट्ट अपनी मां रेवती देवी को लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल आए थे। न्यूरो सर्जन डॉ. मिथिलेश पांडे ने सभी जांचें कराने के बाद रीढ़ की हड्डी टूटी होने की बात कही थी और ऑपरेशन करने की सलाह दी थी। सुरेश का कहना है कि एनस्थीसिया विभाग में जांच के लिए मां रेवती देवी को भेजा गया तो उन्होंने कहा कि ये ऑपरेशन इस संस्थान में नहीं हो सकता है।

मरीज को आपरेशन के दौरान हृदय (हार्ट) की समस्या हो सकती है। मरीज को आपरेशन के लिए बेहोशी देने पर असामयिक मृत्यु हो सकती है और मरीज को सांस लेने की मशीन की जरूरत पड़ सकती है। सुरेश ने प्रमुख सचिव चिकित्सा-शिक्षा और मंडलायुक्त को भेजी शिकायत में कहा है कि हल्द्वानी में आपरेशन एक छोटे से नर्सिंग होम में हो गया। 

पीजी जेआर किसी भी मरीज को रिफर नहीं कर सकते। संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष से अनुमति लेना आवश्यक होता है। इस संबंध में एनस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। 
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डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज 
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