एनस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष के एक और निर्णय ने सुशीला तिवारी अस्पताल की व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया है। अब न्यूरो, आर्थोपेडिक और प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओटी घटा दी गई है। तीनों विभाग के विभागाध्यक्षों ने इसकी शिकायत प्राचार्य से की है।
खास बात यह है कि कई बार शिकायत के बाद भी राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और चिकित्सा-शिक्षा निदेशक कार्रवाई के नाम पर बेबस दिखाई पड़ते हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल का एनस्थीसिया विभाग लंबे समय से सुर्खियों में है।
कई बार मरीजों के ऑपरेशन टाल दिए गए तो कुछ मरीजों को बिना आपरेशन के लौटा दिया गया। विभाग की मनमानी के चलते ही न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक पंवार छोड़कर चले गए थे। न्यूरो सर्जन डॉ. मिथिलेश पांडे ने भी त्याग पत्र देने की बात प्राचार्य से कही थी।
अब प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु सक्सेना ने प्राचार्य को दिए शिकायती पत्र में लिखा है कि सात जुलाई को हुई बैठक में ओटी कम करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया था। बावजूद इसके एनस्थीसिया विभाग की एचओडी ने आर्थोपेडिक की ओटी घटाकर चार दिन और न्यूरो एवं प्लास्टिक सर्जरी की ओटी घटाकर एक दिन कर दी गई थी।
न्यूरो की ओटी डॉ. पंवार के जाने के बाद पहले ही चार से दो दिन की हो गई थी। डॉ. सक्सेना ने निर्णय को गलत बताते हुए कहा है कि पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों को इसका नुकसान होगा। उन्होंने पत्र में लिखा है कि न्यूरो, आर्थो और प्लास्टिक सर्जरी विभाग को टारगेट किया जा रहा है।
खास बात ये है कि ओटी कम करने का आदेश प्राचार्य और एमएस किसी भी स्तर से नहीं निकाला गया है। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा से पूछा गया तो उन्होंने एनस्थीसिया विभाग की एचओडी को बचाने का प्रयास करते हुए कहा कि 18 जून को हुई बैठक में ऐसा निर्णय लिया गया था। सवाल उठता है कि प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने अपने पत्र में लिखा है कि सात जुलाई को बैठक हुई थी और कोई निर्णय नहीं हुआ था।
पीएमओ से आई जांच भी घुमाने का प्रयास
एनस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से की गई थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से मामला मुख्यमंत्री को भेजा गया था और मुख्य सचिव, सचिव चिकित्सा-शिक्षा एवं निदेशक चिकित्सा-शिक्षा से होते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य तक पहुंचा था।
प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि शिकायत में विभागाध्यक्ष द्वारा परेशान किए जाने और उनकी वजह से लोगों के अस्पताल छोड़कर जाने की बात कही गई थी। जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी।
कमेटी में एमएस डॉ. एके पांडे, डॉ. अरुण जोशी और डॉ. जीएस तितियाल थे। प्राचार्य ने बताया कि जांच रिपोर्ट चिकित्सा-शिक्षा निदेशक को भेज दी गई है और आरोप को लेकर कोई साक्ष्य नहीं दिए गए थे। साथ ही शिकायत करने वाले का नाम भी नहीं था। जबकि चिकित्सा-शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष स्याना का कहना है कि जांच रिपोर्ट अभी नहीं मिली है।