पुलिस की सतर्कता से किशोरी करीब दस घंटे के भीतर ही बरामद हो गयी। पुलिस की इस तरह की मुस्तैदी की वजह पिछले साल हुआ लाडली हत्याकांड से लिया गया सबक भी माना जा रहा है। पुलिस इस बार लाडली कांड जैसी कोई अनहोनी का दाग शहर पर नहीं लगने देना चाहती थी। इसके चलते एसएसपी के नेतृत्व में अपहृत किशोरी की बरामदी का अभियान चला। लोगों से अपहर्ताओं के बारे में सुराग जुटाने के लिए एसएसपी ने सादी वर्दी में भी पुलिस के जवान उतार दिए।
किशोरी के अपहरण की सूचना पर क्षेत्र के लोगों में गुस्सा फूट गया। वे सड़क पर उतर आए लोगों ने तीन बार बरेली रोड और एक बार कोतवाली के बाहर जाम लगा दिया। किशोरी को बरामद करने के लिए लोगों का पुलिस पर जबरदस्त दबाव था। यही वजह है कि बरेली रोड में तीन बार लगे जाम को खुलवाने के लिए पुलिस और प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने अपहर्ताओं को पकड़ने के लिए शहर में जाल बिछा दिया।
जगह-जगह चेकिंग और दबिश से आरोपी भी सहम गए। बताया जाता है कि आरोपी बच्ची को शहर से बाहर ले जाने की फिराक में थे। पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते उन्होंने किशोरी को उसके घर छोड़ने का मन बना लिया। आरोपी किशोरी को उसके घर टेंपो से छोड़ने के लिए जा रहे थे कि रास्ते में लोगों की नजर उन पर पड़ गयी। लोगों ने टेंपो को रुकवाकर आरोपियों की जमकर धुनाई कर दी। किशोरी को परिवार के हवाले कर दिया। किशोरी बरामद होने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।