शराब ठेके के खिलाफ उठी विरोध की आवाज का असर सिंडिकेट पर तो नहीं पड़ा लेकिन व्यक्तिगत ठेका लेने वाले लोगों ने पूंजी डूबने की आशंका से हाथ पीछे खींच लिए हैं। यहीं कारण है कि पिछले साल की अपेक्षा इस साल सात हजार कम आवेदन आए।
आबकारी विभाग को आवेदन से राजस्व की वसूली पिछले साल से कम मिली है। न शराब नीति के तहत लाटरी के लिए अधिकतर आवेदन शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने किया है। आबकारी विभाग के अनुसार 61 शराब ठेकों को लेने के लिए पिछले साल साढ़े नौ हजार लोगों ने आवेदन किया था।
इनमें व्यक्तिगत ठेका लेने वालों की संख्या काफी थी, लेकिन नई आबकारी नीति आने के बाद इस बार ठेकों के लिए मात्र 2500 आवेदन जिला आबकारी विभाग को प्राप्त हुए। अनुभवी ठेकेदारों का मानना है कि शराब के खिलाफ जारी आंदोलन से व्यक्तिगत ठेका लेने वाले भयभीत हो गए हैं।
उनको डर था कि यदि दुकान नहीं चली तो पूंजी डूब जाएगी। इसी कारण व्यक्तिगत ठेका लेने वालों ने काफी कम ही आवेदन किया। इधर सिंडिकेट से जुड़े ठेकेदारों ने ठेका लेने के लिए दाव लगाया है। अधिकतर आवेदन सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं। पिछले साल देशी शराब ठेका लेने के लिए 18 हजार और अंग्रेजी के लिए 22 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया था।
इस साल देशी के लिए 22 हजार और अंग्रेजी के लिए 25 हजार रुपये प्रति ठेका शुल्क निर्धारित किया गया। इस मामले में आवेदनों की संख्या कम होने के कारण पिछले साल की अपेक्षा राजस्व की वसूली भी कम हो गई है।
जिला प्रशासन ने 30 मई को लाटरी खोलने की तिथि निर्धारित की है। अब देखना है कि कितने ठेकों की बाजी सिंडिकेट मारता है। लोगों का कहना है कि ठेका लेने के बाद दुकान खोलने के लिए ठेकेदारों को काफी मशक्कत उठानी पड़ेगी। दुकान खुलने के बाद विरोध के स्वर को दबाना ठेकेदारों के लिए भी आसान नहीं होगा।