नैनीताल। राज्य में स्थित प्राथमिक विद्यालयों से लेकर इंटरमीडिएट कालेजों तक की पहचान अब उनके भवनों में किए गए रंगों के आधार पर भी की जा सकेगी। विद्यालय भवनों को आकर्षक स्वरूप देने के लिए शिक्षा विभाग ने प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों के भवनों के लिए कलर कोड तय कर दिया है। भविष्य में जब कभी भी किसी विद्यालय में रंगरोगन होगा तो वह तयशुदा कलर कोड के अनुसार ही होगा।
28 जुलाई को सचिव विद्यालयी शिक्षा की बैठक में विद्यालय भवनों को अलग-अलग कलर कोड देने का फैसला लिया गया। 31 अगस्त को महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड बंशीधर तिवारी की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि जिन विद्यालयों को हाल में ही रूपांतरण किया गया है या जिन विद्यालयों में अभी रंग रोगन की जरूरत नहीं है, उन्हें छोड़ते हुए शेष विद्यालयों में तय कलर कोड के अनुसार ही रंग रोगन कराया जाएगा। भविष्य में भी इसी कलर कोड के आधार पर विद्यालय भवनों में रंग रोगन कर उन्हें आकर्षक बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं। आदेश में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कलर कोड की समीक्षा कर आवश्यक कार्यवाही करने को भी कहा गया है।
ये हैं स्कूल भवनों के कलर कोड
1. राजकीय प्राथमिक विद्यालय (प्राथमिक)
- बाहरी दीवारें टैरा सिल्वर (कलर कोड-0978)
- भवन के मध्य ऊंचाई पर चारों ओर छह इंच मोटाई में ग्रे पट्टी (कलर कोड 8286)
- कक्षा कक्षों के अंदर सफेद रंग
- दरवाजे और खिड़कियों में स्माक ग्रे (कलर कोड 0616 पेंट)
2-राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय (जूनियर)
- बाहरी दीवारें सफेद
- भवन के मध्य ऊंचाई पर चारों ओर छह इंच मोटाई में लाल पट्टी (कलर कोड 8085)
- कक्षा कक्षों के भीतर सफेद
- दरवाजे खिड़की-स्माक ग्रे (कलर कोड 0616)
3- राजकीय हाईस्कूल/इंटर कालेज (माध्यमिक)
- बाहरी दीवारें आफ व्हाइट (कलर कोड 7899)
- भवन के मध्य ऊंचाई पर चारों ओर छह इंच मोटाई में नीली पट्टी (कलर कोड-7326)
- कक्षा कक्षों के अंदर सफेद
- दरवाजे खिड़कियों में फिरोज एक्वालाइट (कलर कोड-0121)
शिक्षा विभाग के आदेश में पेंट कंपनी का नाम
नैनीताल। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड की ओर से स्कूल भवनों के कलर कोड को लेकर जो आदेश जारी किया गया है उसमें एक नामी गिरामी पेंट कंपनी का नाम भी लिखा गया है। हर कलर कोड के आगे इसी कंपनी का नाम दर्ज है। जो कलर कोड तय किए गए हैं वह भी इसी पेंट कंपनी के कोड हैं। अधिकारियों और शिक्षक शिक्षिकाओं के गले यह नहीं उतर रहा है। नाम न छापने की शर्त पर विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि आदेश में पेंट कंपनी का नाम लिखकर अप्रत्यक्ष रूप से इसी कंपनी का पेंट खरीदने की बात कही गई है।