हल्द्वानी। विधानसभा चुनाव में निजी बसों का अधिग्रहण होने से कई बस स्वामियों को बरात की बुकिंग कैंसिल करनी पड़ रही है। दो महीने पहले बस बुक करने के बावजूद अब बस देने से इनकार करने को लेकर बस मालिकों और बुकिंग कराने वाले दूल्हे के परिजनों में तकरार तक की नौबत आ रही है।
केमू से जुड़े बस संचालकों ने बताया कि सहालग के सीजन में बस की बुकिंग से कमाई हो जाती है। दो महीने पहले आठ बरातों की बुकिंग मिली थी। पार्टी से पैसा भी एडवांस मिल गया मगर अब परिवहन विभाग से निर्वाचन कार्य के लिए बस का अधिग्रहण का आदेश पहुंच गया है। ऐसे में बस अब बरात में तो जा नहीं सकेगी, इसलिए बरात की बुकिंग की कैंसिल करनी पड़ी। दो महीने पहले जो बस 27 हजार रुपये में बुक हुई थी, अब पार्टी को किसी तरह बाहर से बुक कराकर देने में 32 से 34 हजार रुपये लग गए। यही हाल छोटी गाड़ियों का भी है। परिवहन विभाग की ओर से छोटी गाड़ियां को भी अधिग्रहण किया जा रहा है। इसलिए बरात ले जाने के लिए लोगों को गाड़ियां नहीं मिल पा रही हैं।
केस- एक
हल्द्वानी से 11 फरवरी को कुसुमखेड़ा क्षेत्र निवासी युवक की बरात अल्मोड़ा जानी थी, बस की बुकिंग दिसंबर में ही कर दी थी। यह बस केमू से जुड़े बस संचालक की थी। बस संचालक ने बताया कि उन्हें भी नहीं पता था कि निर्वाचन में बस का अधिग्रहण हो जाएगा। बस का अधिग्रहण होने पर बुकिंग की धनराशि के साथ अपने पास से पांच हजार रुपये और देकर पार्टी को रुद्रपुर से किसी तरह बस कराई है।
केस - दो
हल्द्वानी से 12 फरवरी को रामपुर रोड से बारात दिल्ली के जाने के लिए बस की बुकिंग कराई गई थी। प्रशासन द्वारा निर्वाचन कार्य में पहाड़ के लिए अधिग्रहण कर लिया गया तथा बस 11 फरवरी को ही चली जाएगी इसलिए ऐनवक्त पर बारात की बुकिंग निरस्त करनी पड़ी। किसी तरह बाहर से दूसरी बस का इंतजाम कराकर पार्टी को समझाना पड़ा।